
नयी दिल्ली: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा लगाए गए टैरिफ रद्द होने के मुद्दे पर केंद्र सरकार की विदेश नीति को लेकर सवाल उठाए हैं। खड़गे ने कहा कि जब टैरिफ का फैसला वापस लिया जा चुका है, तो भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर इतनी जल्दबाज़ी क्यों दिखाई जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार बिना पर्याप्त संसदीय चर्चा और व्यापक परामर्श के महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौतों को आगे बढ़ा रही है। खड़गे का कहना है कि ऐसे समझौते देश के किसानों, छोटे उद्योगों और मध्यम वर्ग पर सीधा असर डालते हैं, इसलिए इन पर पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार ने संभावित आर्थिक प्रभावों का आकलन किया है और क्या राज्यों से इस विषय पर राय ली गई है।
खड़गे ने यह भी कहा कि विदेश नीति केवल कूटनीतिक उपलब्धियों का प्रदर्शन नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसका उद्देश्य राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना होना चाहिए। उनके मुताबिक, किसी भी व्यापार समझौते में घरेलू उद्योग, कृषि क्षेत्र और रोजगार के अवसरों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार वैश्विक मंचों पर छवि सुधारने की कोशिश में घरेलू चिंताओं को नजरअंदाज कर रही है। वहीं, सरकार का पक्ष है कि भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का अहम हिस्सा बन रहा है और रणनीतिक साझेदारियों से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
इस बयान के बाद एक बार फिर भारत की विदेश नीति, व्यापारिक समझौतों और आर्थिक प्राथमिकताओं को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। आने वाले दिनों में संसद और सार्वजनिक मंचों पर इस मुद्दे पर और तीखी चर्चा देखने को मिल सकती है।






