
पटना। जनता दल यूनाईटेड (जदयू) ने गुरूवार को कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य सरकार ने अगले पांच वर्षों में आधुनिक शिक्षा अवसंरचना विकसित करने का स्पष्ट और दूरदर्शी लक्ष्य निर्धारित किया है। जदयू प्रदेश प्रवक्ता परिमल कुमार, हिमराज राम एवं मीडिया पैनलिस्ट डा. मधुरेंदु पांडेय ने आज बयान जारी कर कहा कि बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन की दिशा में राज्य सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री कुमार के नेतृत्व में राज्य सरकार ने अगले पांच वर्षों में आधुनिक शिक्षा अवसंरचना विकसित करने का स्पष्ट और दूरदर्शी लक्ष्य निर्धारित किया है।
विधानसभा में पारित लगभग 70 हजार करोड़ रुपये के शिक्षा बजट के माध्यम से बिहार को ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार का अग्रणी केंद्र बनाने की ठोस रूपरेखा तैयार की गई है। जदयू नेताओं ने कहा कि बिहार में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप एक अत्याधुनिक एजुकेशन सिटी की स्थापना की जाएगी, जो हाईटेक एजुकेशन, रिसर्च और इनोवेशन का प्रमुख केंद्र बनेगी। उन्होंने कहा कि इस एजुकेशन सिटी में वैश्विक स्तर की शैक्षणिक सुविधाएं, अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, डिजिटल लाइब्रेरी, स्टार्टअप एवं इनोवेशन हब और एक सैटेलाइट कॉम्प्लेक्स की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए उपयुक्त स्थान का चयन शीघ्र किया जाएगा। जदयू नेताओं ने कहा कि शिक्षा विभाग के लिए 60,204 करोड़ रुपये, उच्च शिक्षा विभाग के लिए 8,003 करोड़ रुपये तथा तकनीकी शिक्षा विभाग के लिए 1,003 करोड़ रुपये का प्रावधान राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यह निवेश केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, अनुसंधान को बढ़ावा देने, नई तकनीकों के समावेश और युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाने की दिशा में निर्णायक सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने 55 कॉलेजों को ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित करने का भी संकल्प लिया है, जिन पर लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन संस्थानों में अकादमिक गुणवत्ता, शोध गतिविधियों और कौशल विकास को नए आयाम दिए जाएंगे, जिससे बिहार के छात्र-छात्राओं को राज्य में ही विश्वस्तरीय शिक्षा का अवसर प्राप्त होगा। जदयू नेताओं ने कहा कि यह पहल बिहार को शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाएगी। यह कदम न केवल राज्य के युवाओं के सपनों को साकार करेगा, बल्कि बिहार को आत्मनिर्भर और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाएगा।






