
पटना। बिहार सरकार के श्रम संसाधन मंत्री संजय सिंह ‘टाइगर’ ने बुधवार को बिहार विधानसभा में कहा कि सरकार प्रदेश में बीड़ी मजदूरों के शोषण से जुड़ी समस्या पर गौर करेगी और उसके समयक समाधान पर विचार करेगी। मंत्री श्री सिंह ने विधायक आई पी गुप्ता के अल्पसूचित सवाल का जवाब देते हुए कहा कि बीड़ी मजदूरों का पंजीकरण भारत सरकार के पोर्टल ई-श्रम पर किया जाता है, लेकिन उन्हें मिलने वाले भुगतान में अगर नियम विरुद्ध विसंगतियां हैं तो बिहार सरकार उंसके सम्यक समाधान पर विचार करेगी। श्री गुप्ता ने अपने पूरक सवाल के माध्यम से पूछा कि क्या बीड़ी मजदूरों का परिचय पत्र बिहार सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा कि बिहार में बीड़ी क्षेत्र में अपंजीकृत श्रमिकों की संख्या पंजीकृत के मुकाबले बहुत ज्यादा है और सरकार का एक लाख 74 हजार का डेटा ठीक नही है।
इस सवाल का जवाब देते हुए मंत्री श्री सिंह ने कहा कि इस बात की संभावना से इंकार नही किया जा सकता कि अपंजीकृत श्रमिक ज्यादा तादाद में हों, लेकिन बिहार सरकार उन्हें पंजीकृत नही करती है। उन्होंने कहा कि असंगठित कामगार और शिल्पकार सुरक्षा योजना के तहत मजदूरों का पंजीकरण केंद्र सरकार के पोर्टल ई-श्रम पर किया जाता है। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार के श्रम-पोर्टल पर भवन निर्माण से जुड़े और अन्य मजदूरों का पंजीकरण किया जाता है। उन्होंने कहा कि जहां तक मजदूरों की चिकित्सा का सवाल है, उसके किये किसी परिचय पत्र की आवश्यकता नही है। उन्होंने कहा कि बिना पंजीकृत मजदूर भी बिहार शताब्दी असंगठित कामगार एवं शिल्पकार सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत पंजीकरण कर चिकित्सा सुविधा का लाभ ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल बिहार सरकार बीड़ी मजदूर के पंजीकरण की व्यवस्था नही कर सकती है, लेकिन जहां तक उनकी मजदूरी से संबंधित विसंगतियों का सवाल है सरकार उसके सम्यक समाधान पर विचार कर सकती है।
इससे पहले सदन में विधायक आई पी गुप्ता ने अल्पसूचित सवाल के माध्यम से बीड़ी मजदूरों के शोषण का मुद्दा उठाया और कहा कि राज्य में वीड़ी श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी 412 रुपया सरकार की तरफ से अधिसूचित है, लेकिन कोई भी बीड़ी कम्पनी श्रमिकों को इसके अनुसार भुगतान नही कर रही है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों को मात्र 100 रुपया प्रति हजार बीड़ी के हिसाब से भुगतान मिल रहा है और 8-10 घंटा मजदूरी करने के बावजूद श्रमिक 150 से 200 रुपया ही कमा पा रहे हैं।उन्होंने कहा कि अनुमान के अनुसार जमुई में लगभग 10 लाख, बिहारशरीफ में लगभग 2.5 लाख, सहरसा में लगभग 2 लाख, खगड़िया में लगभग 1.5 लाख सहित राज्य भर के लाखों बीड़ी श्रमिक लाचारी में जीवन-यापन करने को मजबूर हैं।उन्होंने बीड़ी श्रमिकों को उचित मजदूरी दिलाने तथा उन्हें अन्य सुविधाएँ प्रदान करने हेतु कार्रवाई करने की मांग की। विधायक ने यह भी कहा कि बीड़ी निर्माण से जुड़े कार्यों में जुड़ी महिलाएं धीरे धीरे बीड़ी पीने भी लगती हैं और इससे उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि बीड़ी निर्माण के बड़े हब झाझा में सरकार बीमार श्रमिकों के इलाज के लिए आसपास के इलाके में अस्पताल की भी व्यवस्था करे।






