नयी दिल्ली: भारत और फ्रांस ने अपने रक्षा संबंधों को नई मजबूती देते हुए 10 वर्षीय रक्षा सहयोग समझौते का नवीनीकरण किया है। यह अहम फैसला दोनों देशों के बीच आयोजित छठे वार्षिक रक्षा संवाद के दौरान लिया गया, जिसकी सह-अध्यक्षता भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और फ्रांस की प्रतिनिधि कैथरीन वॉट्रिन ने की। इस समझौते को दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस रक्षा संवाद के दौरान भारत में अत्याधुनिक हैमर मिसाइलों के संयुक्त निर्माण को लेकर भी महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता भारत की सरकारी रक्षा कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और फ्रांस की प्रमुख रक्षा कंपनी Safran Electronics & Defense के बीच हुआ है। इस संयुक्त उत्पादन से भारत की रक्षा निर्माण क्षमता को बढ़ावा मिलेगा और देश की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और मजबूत कदम साबित होगा।
हैमर मिसाइलें अपनी सटीकता, लंबी दूरी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में प्रभावी हमले की क्षमता के लिए जानी जाती हैं। इनका भारत में निर्माण शुरू होने से भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही, दोनों देशों ने अपने सैन्य सहयोग को और मजबूत करने के लिए भारतीय सेना और फ्रांसीसी थलसेना के बीच अधिकारियों की परस्पर तैनाती का भी निर्णय लिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता न केवल रक्षा क्षेत्र में तकनीकी सहयोग को बढ़ाएगा, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भारत और फ्रांस के बीच बढ़ता यह रक्षा सहयोग दोनों देशों के मजबूत भरोसे और साझा रणनीतिक हितों को दर्शाता है, जिससे भविष्य में रक्षा, तकनीक और सुरक्षा के क्षेत्र में नए अवसर खुलने की उम्मीद है।







