बिज़नेस डेस्क: थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर आधारित महंगाई दर में हालिया बढ़ोतरी ने आर्थिक मोर्चे पर नई चिंता पैदा कर दी है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 में थोक महंगाई दर बढ़कर नौ महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। इस वृद्धि के पीछे मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों, ईंधन और विनिर्माण उत्पादों की कीमतों में आई तेजी को जिम्मेदार माना जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सब्जियों, अनाज, दालों और खाद्य तेलों की कीमतों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे थोक महंगाई पर सीधा असर पड़ा है। इसके अलावा, कच्चे तेल और ऊर्जा से जुड़े उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भी महंगाई को ऊपर की ओर धकेला है। विनिर्माण क्षेत्र में कच्चे माल की लागत बढ़ने के कारण तैयार उत्पादों की कीमतों में भी वृद्धि देखी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि थोक महंगाई में यह वृद्धि आने वाले समय में खुदरा महंगाई (CPI) पर भी प्रभाव डाल सकती है, जिससे आम लोगों के दैनिक खर्च में और बढ़ोतरी हो सकती है। यह स्थिति आर्थिक नीतियों को प्रभावित कर सकती है और ब्याज दरों को लेकर फैसलों पर भी असर डाल सकती है।
भारतीय रिज़र्व बैंक पहले से ही महंगाई पर कड़ी नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर मौद्रिक नीति में बदलाव कर सकता है। महंगाई में लगातार वृद्धि से आर्थिक स्थिरता और उपभोक्ता मांग पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
सरकार और संबंधित एजेंसियां कीमतों को नियंत्रित करने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक कदम उठा रही हैं। आने वाले महीनों में वैश्विक बाजार, कच्चे तेल की कीमतें और घरेलू आपूर्ति की स्थिति महंगाई की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।







