नयी दिल्ली: 1993 के सिलसिलेवार बम धमाकों के दोषी अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने उनकी समय से पहले रिहाई की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया, जिससे उनकी जल्द रिहाई की उम्मीदों पर फिलहाल विराम लग गया है। अबू सलेम ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि उन्होंने जेल में निर्धारित अवधि से अधिक समय बिताया है और प्रत्यर्पण समझौते के तहत उन्हें सीमित अवधि से अधिक कैद में नहीं रखा जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान सभी कानूनी पहलुओं पर विचार किया और पाया कि रिहाई के लिए प्रस्तुत आधार पर्याप्त नहीं हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह के गंभीर अपराधों में सजा और रिहाई से जुड़े निर्णय कानून और स्थापित प्रक्रियाओं के अनुसार ही लिए जाएंगे। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि दोषी को राहत देने से पहले सभी कानूनी प्रावधानों और शर्तों का पूरी तरह पालन होना आवश्यक है।
अबू सलेम 1993 के मुंबई बम धमाकों के मुख्य आरोपियों में शामिल रहा है, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान गई थी और देश की आर्थिक राजधानी दहशत से दहल गई थी। उसे पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित किया गया था और तब से वह विभिन्न मामलों में सजा काट रहा है। उसकी ओर से बार-बार समय से पहले रिहाई की मांग की जाती रही है, लेकिन अदालतों ने अब तक इस पर सख्त रुख बनाए रखा है।
इस फैसले के बाद अबू सलेम के लिए तत्काल राहत की संभावना खत्म हो गई है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि वह भविष्य में अन्य कानूनी विकल्पों का सहारा ले सकता है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला एक बार फिर यह संदेश देता है कि गंभीर आतंकवादी अपराधों में कानून सख्ती से लागू किया जाएगा और न्याय प्रक्रिया से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।







