नयी दिल्ली: नरेंद्र मोदी शनिवार को असम के महत्वपूर्ण दौरे पर पहुंचे, जिसकी शुरुआत डिब्रूगढ़ में इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) पर उनके विमान की लैंडिंग से हुई। यह लैंडिंग न केवल बुनियादी ढांचे की मजबूती का प्रतीक है, बल्कि चीन सीमा से सटे उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में भारत की सामरिक तैयारियों को भी नई ताकत देती है। प्रधानमंत्री ने यहां फाइटर जेट, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर के हवाई प्रदर्शन का अवलोकन किया।
यह ELF उत्तर-पूर्व भारत की पहली ऐसी सुविधा है, जिसे भारतीय वायुसेना के सहयोग से विकसित किया गया है। इसे डुअल-यूज इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में डिजाइन किया गया है, जिससे जरूरत पड़ने पर सैन्य और नागरिक दोनों प्रकार के विमान इसका उपयोग कर सकेंगे। यह रनवे 40 टन तक के फाइटर जेट और 74 टन तक के भारी ट्रांसपोर्ट विमान को संभालने में सक्षम है। प्राकृतिक आपदाओं या आपात स्थितियों में यह सुविधा राहत और बचाव कार्यों को तेज और प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ब्रह्मपुत्र नदी पर बने 3,030 करोड़ रुपये की लागत वाले कुमार भास्कर वर्मा सेतु का भी निरीक्षण करेंगे। यह छह लेन का आधुनिक पुल गुवाहाटी और नॉर्थ गुवाहाटी को जोड़ता है और इससे यात्रा समय कम होने के साथ कनेक्टिविटी मजबूत होगी। पुल में भूकंपरोधी तकनीक और रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए गए हैं, जिससे इसकी सुरक्षा और स्थायित्व सुनिश्चित होता है।
इसके अलावा प्रधानमंत्री गुवाहाटी में 5,450 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। इनमें कामरूप जिले के अमिंगांव में नेशनल डेटा सेंटर और भारतीय प्रबंधन संस्थान गुवाहाटी के नए कैंपस का उद्घाटन शामिल है। इन परियोजनाओं से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा। प्रधानमंत्री का यह दौरा उत्तर-पूर्व को सुरक्षा, कनेक्टिविटी और विकास के नए युग में ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।







