मुंबई: मध्य महाराष्ट्र के परभणी नगर निगम (PCMC) में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट – UBT) और कांग्रेस के चुनावी गठबंधन ने नए राजनीतिक भूचाल का संकेत दिया है। मंगलवार को हुए मेयर चुनाव में सैयद इकबाल को मेयर चुना गया, जिन्होंने भाजपा के उम्मीदवार तिरुमाला खिलारे को 13 वोटों के अंतर से पराजित किया। सैयद इकबाल ने कुल 39 वोट हासिल किए, जबकि भाजपा उम्मीदवार को 26 वोट ही मिले। उप मेयर का पद कांग्रेस के पार्षद गणेश देशमुख को मिला।
इस परिणाम के साथ परभणी महाराष्ट्र का एकमात्र नगर निगम बन गया है, जहां उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने मेयर पद पर कब्ज़ा किया है। इस जीत को शिवसेना (UBT) और कांग्रेस के चुनाव पूर्व गठबंधन का प्रत्यक्ष परिणाम माना जा रहा है।
इस जीत के बाद भाजपा और अन्य राजनीतिक हलकों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा के राज्य प्रवक्ता नवनाथ बान ने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे परभणी में औरंगजेब के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार में मराठी मानुष के नाम का इस्तेमाल किया गया, लेकिन अंतिम फैसले में मुस्लिम उम्मीदवार को मैदान में उतारा गया, जो मराठी समाज की अनदेखी है।
वहीं, शिवसेना नेता संजय निरुपम ने भी उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी पर मुस्लिम वोट बैंक के लिए वैचारिक आधार से भटकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुंबई और अन्य क्षेत्रों में मुस्लिम समर्थन के बिना चुनाव में दो अंकों तक पहुंचना मुश्किल है और सैयद इकबाल की मेयर बनना इसी रणनीति का हिस्सा है। निरुपम ने सवाल उठाया कि क्या उद्धव ठाकरे अब भी बालासाहेब ठाकरे के आदर्शों के सच्चे उत्तराधिकारी होने का दावा करेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परभणी का यह परिणाम उद्धव ठाकरे के नेतृत्व और राज्य में गठबंधन राजनीति में बदलाव की दिशा का संकेत देता है। इस घटना ने भाजपा-शिवसेना (UBT) और कांग्रेस के बीच महाराष्ट्र की स्थानीय राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दे दिया है।







