नयी दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ताजा छमाही रिपोर्ट ने एक बार फिर वैश्विक आतंकवाद के नेटवर्क और उसकी जड़ों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 1267 प्रतिबंध समिति की निगरानी टीम द्वारा जारी इस रिपोर्ट में जैश-ए-मोहम्मद का नाम कई आतंकी घटनाओं से जोड़ा गया है, जिनमें पिछले वर्ष नवंबर में दिल्ली के लाल किला के पास हुआ कार बम धमाका भी शामिल है। इस हमले में 15 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे। रिपोर्ट में एक सदस्य देश के हवाले से कहा गया है कि जैश-ए-मोहम्मद ने विभिन्न हमलों की जिम्मेदारी ली और उसे लाल किला धमाके से भी जोड़ा गया है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि संगठन के प्रमुख मसूद अजहर ने अक्टूबर में महिलाओं के लिए एक अलग विंग ‘जमात उल मुमिनात’ के गठन की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य आतंकी गतिविधियों को समर्थन देना बताया गया। इसके अतिरिक्त, पहलगाम हमले से जुड़े तीन संदिग्धों के जुलाई में मारे जाने की जानकारी भी सामने आई है।
लाल किला के निकट 10 नवंबर को हुआ विस्फोट देश की सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती माना गया था। जांच एजेंसियों को अंतरराज्यीय मॉड्यूल और सीमा पार कनेक्शन के संकेत मिले थे। पहले की गिरफ्तारियों और बाद की जांच में कई सुराग एक-दूसरे से जुड़ते दिखाई दिए।
यह रिपोर्ट वैश्विक समुदाय के लिए एक चेतावनी के रूप में देखी जा रही है कि प्रतिबंधों और निगरानी के बावजूद आतंकी ढांचे पूरी तरह निष्क्रिय नहीं हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि वित्तीय स्रोतों पर रोक, भर्ती तंत्र पर अंकुश और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की ठोस रणनीति आवश्यक है। आतंक के खिलाफ लड़ाई तभी निर्णायक हो सकती है जब उसे पनाह और समर्थन देने वाले तंत्र पर भी समान कठोरता से कार्रवाई की जाए।







