नयी दिल्ली: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि नई श्रम संहिताएं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते देश के मजदूरों और किसानों के हितों के खिलाफ हैं। राहुल गांधी ने कहा कि जब श्रमिकों और किसानों के भविष्य से जुड़े अहम फैसले लिए गए, तब उनकी आवाज़ को नजरअंदाज कर दिया गया।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि देशभर में लाखों मजदूर और किसान अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं। उनके मुताबिक, मजदूरों को आशंका है कि चार नई श्रम संहिताएं उनके अधिकारों को कमजोर कर सकती हैं। वहीं किसानों को डर है कि हालिया व्यापार समझौते, खासकर अमेरिका के साथ संभावित समझौतों का असर उनकी आजीविका पर पड़ सकता है। उन्होंने मनरेगा का भी जिक्र करते हुए कहा कि यदि इसे कमजोर या समाप्त किया गया तो गांवों का अंतिम सहारा भी छिन जाएगा।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि क्या वे मजदूरों और किसानों की बात सुनेंगे या उन पर किसी “ग्रिप” का प्रभाव ज्यादा मजबूत है। उन्होंने कहा कि वे मजदूरों और किसानों के संघर्ष के साथ मजबूती से खड़े हैं।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर चार नई श्रम संहिताएं—वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यस्थिति संहिता—लागू करने की प्रक्रिया शुरू की है। सरकार का दावा है कि इससे ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा मिलेगा और श्रम कानूनों में एकरूपता आएगी। हालांकि विपक्ष और कई ट्रेड यूनियन इन संहिताओं को श्रमिक हितों के खिलाफ बताते हुए विरोध जता रहे हैं।







