
नयी दिल्ली: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने की मांग को लेकर विपक्ष द्वारा दिया गया नोटिस तकनीकी खामियों के कारण चर्चा का विषय बन गया है। लोकसभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, नोटिस में घटनाक्रम का उल्लेख करते समय चार स्थानों पर वर्ष 2026 की जगह फरवरी 2025 लिखा गया था। नियमों के तहत इस प्रकार की त्रुटि के आधार पर नोटिस को खारिज किया जा सकता था। हालांकि, अध्यक्ष ओम बिरला ने इस पर कठोर रुख अपनाने के बजाय सचिवालय को निर्देश दिया कि नोटिस में मौजूद कमियों को दूर कर आगे की कार्रवाई की जाए।
सूत्रों ने बताया कि बिरला ने नियमों के अनुरूप त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। संशोधित नोटिस प्राप्त होने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसकी जांच की जाएगी। संभावना है कि बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत के बाद इस प्रस्ताव को विचारार्थ सूचीबद्ध किया जाएगा।
विपक्षी सांसदों ने मंगलवार को लोकसभा महासचिव को यह नोटिस सौंपते हुए बिरला पर सदन की कार्यवाही पक्षपातपूर्ण ढंग से संचालित करने, कांग्रेस सदस्यों पर झूठे आरोप लगाने और अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया था। विपक्ष का कहना है कि अध्यक्ष की कार्यशैली संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है।
इस घटनाक्रम ने संसद में सियासी हलचल तेज कर दी है। एक ओर विपक्ष इसे लोकतांत्रिक जवाबदेही का मुद्दा बता रहा है, वहीं सत्तापक्ष इसे राजनीतिक रणनीति करार दे रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संशोधित नोटिस पर आगे क्या कदम उठाया जाता है और क्या यह प्रस्ताव सदन में चर्चा तक पहुंच पाता है या नहीं।






