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बदलता मौसम बना बीमारी की वजह, बिहार में सर्दी-जुकाम और बुखार के मरीज तेजी से बढ़े

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Changing weather has become a cause of illness, with a sharp increase in the number of colds and fevers in Bihar.

मुजफ्फरपुर: मुजफ्फरपुर जिले में बीते दो दिनों से लगातार बदलते मौसम का व्यापक असर स्वास्थ्य पर दिखने लगा है। दिन और रात के तापमान में करीब 15 डिग्री सेल्सियस के अंतर के कारण दिन में तेज धूप और शाम होते ही ठंड का अहसास हो रहा है। मौसम के इस दोहरे प्रभाव से आम लोगों के साथ-साथ बच्चों और बुजुर्गों की सेहत प्रभावित हो रही है। जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों की ओपीडी में सर्दी, जुकाम और वायरल बुखार के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आम दिनों की तुलना में मरीजों की संख्या में करीब 40 प्रतिशत तक इजाफा दर्ज किया गया है। इसे देखते हुए सदर अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेष इंतजाम किए गए हैं। केवल जिला सदर अस्पताल में रोजाना 800 से 900 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिनमें मेडिसिन और शिशु ओपीडी में संख्या सबसे अधिक है।

मौसम के इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर बच्चों और बुजुर्गों के इम्यून सिस्टम पर पड़ रहा है। चिकित्सकों के अनुसार, दिन-रात के तापमान में उतार-चढ़ाव से रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। वायरल फीवर, गले का संक्रमण और सांस से जुड़ी समस्याओं वाले मरीज अधिक सामने आ रहे हैं। शहर के फिजिशियन डॉ. चंदन कुमार का कहना है कि तापमान में बदलाव के कारण वायरल बुखार के मामले बढ़ते हैं। ऐसे में गर्म कपड़ों के इस्तेमाल में लापरवाही नहीं करनी चाहिए। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने, गर्म पानी और गर्म भोजन लेने तथा ठंडी चीजों से परहेज करने की सलाह दी गई है। धूल-मिट्टी से बचाव भी जरूरी बताया गया है ताकि सांस संबंधी बीमारियां न हों।

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कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अंशु अग्रवाल के अनुसार, मौसम में अचानक बदलाव से बुजुर्गों में कार्डियक अटैक का खतरा बढ़ सकता है। ठंड और गर्मी के अचानक असर से ब्लड प्रेशर प्रभावित होता है। उन्होंने बिना चिकित्सकीय परामर्श के दवा न लेने की चेतावनी दी है। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. गोपाल शंकर सहनी बताते हैं कि ठंड और गर्म मौसम का संयुक्त असर बच्चों में संक्रमण को बढ़ाता है। बच्चों में सर्दी-जुकाम या बुखार को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह वायरल फीवर होकर गंभीर रूप ले सकता है। नवजात बच्चों को विशेष देखभाल और डॉक्टर की सलाह के बिना दवा न देने की हिदायत दी गई है। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सिविल सर्जन डॉ. अजय कुमार ने बताया कि मौसम में बदलाव के असर को ध्यान में रखते हुए अस्पतालों में पूरी तैयारी की गई है। चिकित्सकों को समय पर ओपीडी में मौजूद रहने और बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त काउंटर खोलने की भी व्यवस्था रखी गई है, ताकि कोई भी मरीज इलाज के अभाव में न लौटे।





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