नयी दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच टकराव और गहराता नजर आ रहा है। ताजा घटनाक्रम में विपक्षी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी दल सोमवार को यह प्रस्ताव पेश कर सकते हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया जा रहा है जब विपक्ष का आरोप है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को सदन में बोलने से रोका गया।
खबरों के अनुसार, यह फैसला संसद भवन परिसर में राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यालय में हुई INDIA ब्लॉक के नेताओं की बैठक में लिया गया। बैठक में राहुल गांधी भी मौजूद थे। विपक्षी नेताओं का कहना है कि संसदीय परंपराओं के अनुसार नेता प्रतिपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार होता है, लेकिन मौजूदा हालात में उन्हें बार-बार रोका जा रहा है।
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि संसदीय नियमों के तहत विपक्ष का नेता “छाया प्रधानमंत्री” की भूमिका निभाता है, लेकिन मौजूदा सरकार में विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को सदन में खुलकर बोलने की पूरी छूट है, जबकि विपक्ष को अपनी बात रखने तक की अनुमति नहीं दी जा रही। वेणुगोपाल ने यह भी आरोप लगाया कि लोकसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस की महिला सांसदों पर आरोप लगाए, लेकिन विपक्ष को जवाब देने का मौका नहीं दिया गया।
विपक्ष का कहना है कि राहुल गांधी अमेरिका-भारत व्यापार समझौते जैसे अहम मुद्दे पर सदन में अपनी बात रखना चाहते थे, लेकिन उन्हें इसकी भी इजाजत नहीं दी गई। कांग्रेस ने लोकसभा अध्यक्ष के प्रति अविश्वास जताते हुए निलंबित आठ सांसदों का निलंबन रद्द करने की मांग भी की है।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता संजय झा ने कहा कि सांसदों के निलंबन के बाद विपक्ष के पास सदन के भीतर अपनी बात रखने के बेहद सीमित अवसर रह गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संसद को अपने पक्ष में सुरक्षित रखना चाहती है और विपक्ष की भूमिका को कमजोर किया जा रहा है। पिछले सप्ताह चीन के साथ 2020 के गतिरोध पर चर्चा के दौरान भी हंगामे के बीच राहुल गांधी को बोलने से रोका गया था, जिसके बाद यह विवाद और गहरा गया।







