बिज़नेस डेस्क: लोन लेने वाले लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लोन रिकवरी एजेंटों की मनमानी पर लगाम कसते हुए सख्त नियम लागू किए हैं। अक्सर शिकायतें मिलती थीं कि रिकवरी एजेंट फोन कॉल, धमकी, गलत भाषा और मानसिक दबाव के जरिए ग्राहकों को परेशान करते हैं। अब RBI ने साफ कर दिया है कि किसी भी हाल में ग्राहकों के साथ दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
RBI के नए दिशा-निर्देशों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि लोन रिकवरी की प्रक्रिया मानवीय, पारदर्शी और कानून के दायरे में हो। बैंक और एनबीएफसी (NBFC) अब अपने रिकवरी एजेंटों की हरकतों के लिए सीधे जिम्मेदार होंगे। अगर कोई एजेंट नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था पर भी कार्रवाई हो सकती है।
RBI के 3 खास नियम इस प्रकार हैं:
पहला नियम:
रिकवरी एजेंट ग्राहक को तय समय के अलावा कॉल या मुलाकात नहीं कर सकेंगे। सुबह जल्दी या देर रात संपर्क करना पूरी तरह प्रतिबंधित होगा। इससे ग्राहकों की निजता और मानसिक शांति बनी रहेगी।
दूसरा नियम:
रिकवरी के दौरान किसी भी तरह की धमकी, अपमानजनक भाषा, दबाव या डराने-धमकाने की अनुमति नहीं होगी। एजेंट को शालीन व्यवहार करना अनिवार्य होगा और ग्राहक की गरिमा का पूरा सम्मान करना होगा।
तीसरा नियम:
एजेंट को अपनी पहचान स्पष्ट करनी होगी और यह बताना होगा कि वह किस बैंक या वित्तीय संस्था की ओर से आया है। बिना पहचान या फर्जी तरीके से वसूली करना अब नियमों का सीधा उल्लंघन माना जाएगा।
RBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर किसी ग्राहक को रिकवरी एजेंट से शिकायत है, तो वह बैंक की शिकायत प्रणाली या RBI के शिकायत पोर्टल पर सीधे शिकायत दर्ज कर सकता है। इन नियमों से न सिर्फ ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि बैंकिंग सिस्टम को भी अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाया जा सकेगा। अब लोन रिकवरी के नाम पर उत्पीड़न की जगह कानून और नियमों की ताकत बोलेगी।







