लाइफस्टाइल: प्रसिद्ध कथावाचक और मोटिवेशनल स्पीकर जया किशोरी एक बार फिर अपनी सादगी और मूल्यों को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में वे राजस्थान के प्रसिद्ध खाटूश्याम मंदिर पहुंचीं, जहां उनकी भक्ति से ज्यादा लोगों का ध्यान उनके पहनावे ने खींचा। जया किशोरी ने इस पावन यात्रा के दौरान कोई नया या महंगा परिधान नहीं, बल्कि पहले पहना हुआ पुराना कोट पहनना ही उचित समझा। यही बात उन्हें खास बनाती है।
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों में जया किशोरी बेहद साधारण अंदाज में नजर आ रही हैं। बिना किसी दिखावे, भारी मेकअप या लग्ज़री ब्रांड्स के, वे आम श्रद्धालुओं की तरह कतार में खड़ी दिखीं। उनका यह अंदाज लोगों को इसलिए भी भाया क्योंकि आज के समय में जहां धार्मिक यात्राएं भी स्टाइल और प्रदर्शन का मंच बनती जा रही हैं, वहीं जया किशोरी ने सादगी का संदेश दिया।
जया किशोरी पहले भी कई बार यह कह चुकी हैं कि कपड़े इंसान की पहचान नहीं होते, बल्कि उसका व्यवहार, विचार और संस्कार ही उसे महान बनाते हैं। पुराने कोट को दोबारा पहनना उनके इसी विचारधारा को दर्शाता है। यह कदम न केवल पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संकेत देता है, बल्कि उपभोक्तावाद और दिखावे की संस्कृति पर भी एक शांत लेकिन मजबूत टिप्पणी है।
श्रद्धालुओं और उनके प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर उनकी जमकर तारीफ की। कई लोगों ने लिखा कि “यही है असली अमीरी” तो कुछ ने कहा कि “जया किशोरी आज की पीढ़ी के लिए मिसाल हैं।” खाटूश्याम मंदिर में उनकी उपस्थिति ने न सिर्फ भक्तों को प्रेरित किया, बल्कि यह भी दिखाया कि आध्यात्मिकता का संबंध बाहरी चमक-दमक से नहीं, बल्कि भीतर की श्रद्धा से होता है।
कुल मिलाकर, जया किशोरी का पुराना कोट पहनना सिर्फ एक फैशन चॉइस नहीं, बल्कि एक गहरा संदेश है—सादगी अपनाइए, दिखावा छोड़िए और अपने मूल्यों के साथ खड़े रहिए। यही वजह है कि उनका हर कदम लोगों के दिल को छू जाता है।







