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चुनाव आयोग का सख्त संदेश: पश्चिम बंगाल सरकार को 9 फरवरी तक अनुपालन का अल्टीमेटम

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Election Commission issues stern message: West Bengal government receives ultimatum to comply by February 9

पश्चिम बंगाल: भारत निर्वाचन आयोग (EC) ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा चुनाव संबंधी निर्देशों के कथित रूप से लगातार उल्लंघन पर कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को भेजे एक सख्त पत्र में गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए स्पष्ट किया है कि बार-बार चेतावनी और स्मरण पत्र भेजे जाने के बावजूद कई अहम निर्देशों का अब तक पालन नहीं किया गया है। इसके मद्देनज़र आयोग ने 9 फरवरी 2026 तक समयबद्ध अनुपालन की अंतिम समयसीमा तय की है।

निर्वाचन आयोग के अनुसार, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 के प्रावधानों के तहत दो निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ERO), दो सहायक ERO और एक डेटा एंट्री ऑपरेटर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जानी थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई है। आयोग ने इस संदर्भ में 5 अगस्त 2025 और 2 जनवरी 2026 को भेजे गए अपने पूर्व पत्रों का भी उल्लेख किया है।

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आयोग ने यह भी बताया कि बशीरहाट-2 की सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी और प्रखंड विकास अधिकारी सुमित्रा प्रतिम प्रधान को निलंबित नहीं किया गया है, जबकि उन पर वैधानिक नियमों के उल्लंघन और 11 अतिरिक्त AEERO की अनधिकृत नियुक्ति का आरोप है। यह कार्रवाई उच्चतम न्यायालय के 21 सितंबर 2000 के आदेश और 31 मई 2023 को जारी आयोग के निर्देशों के विपरीत बताई गई है।

इसके अतिरिक्त, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े निर्देशों के उल्लंघन पर भी आयोग ने नाराजगी जताई है। तीन मतदाता सूची पर्यवेक्षकों के तबादलों को रद्द न किए जाने को लेकर भी आयोग ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि यह देरी न केवल आयोग के निर्देशों बल्कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की भी अवहेलना है। आयोग ने यह भी चेताया है कि यदि तय समयसीमा तक अनुपालन नहीं किया गया, तो आगे सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

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