नयी दिल्ली: दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा (Crime Branch) ने अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की शिकायतों पर दर्ज दो प्राथमिकी (FIR) के आधार पर की गई। सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तारी लाल किले के पास हुए हालिया विस्फोट के बाद विश्वविद्यालय के संचालन में कथित अनियमितताओं और वित्तीय धोखाधड़ी के संबंध में की गई जांच के हिस्से के रूप में हुई।
जवाद सिद्दीकी को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है। मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की सक्रियता ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसने वित्तीय अनियमितताओं की जांच शुरू की थी। ED की कार्यवाही के बाद पुलिस ने तेज़ी से कार्रवाई करते हुए चेयरमैन को हिरासत में लिया।
जांच में यह भी सामने आया कि विश्वविद्यालय के कुछ कर्मचारियों का संदिग्ध इतिहास है। इनमें 2000 के लाल किले ब्लास्ट में दोषी ठहराए गए डॉ. उमर नबी और दो अन्य सहयोगी डॉ. मुज़म्मिल शकील तथा डॉ. शाहीन शाहिद शामिल हैं, जो कथित ‘व्हाइट-कॉलर’ आतंकी नेटवर्क से जुड़े बताए जा रहे हैं। इस खुलासे ने राष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय की भर्ती और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े कर दिए।
इसके अलावा, नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल (NAAC) ने विश्वविद्यालय की कथित झूठी मान्यता दावों पर नोटिस जारी किया और यूनिवर्सिटी की वेबसाइट को ऑफलाइन कर दिया। ED अब यूनिवर्सिटी की फंडिंग और विशेषकर मेडिकल स्टाफ से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच कर रहा है।
अधिकारी स्पष्ट कर रहे हैं कि जांच अभी जारी है और आगे सिद्दीकी से विस्तृत पूछताछ की जाएगी। यह गिरफ्तारी विश्वविद्यालय में प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं की जांच में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।







