
पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर जारी सियासी और कानूनी टकराव अब सुप्रीम कोर्ट के केंद्र में आ गया है। बुधवार को इस मामले की अहम सुनवाई होनी है, जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी न सिर्फ एक याचिकाकर्ता के तौर पर पेश होंगी, बल्कि खुद अपना पक्ष रखने की अनुमति भी अदालत से मांगेंगी। सूत्रों के मुताबिक, LLB की डिग्री रखने वाली ममता बनर्जी ने एक अंतरिम याचिका दाखिल कर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया से सीधे अपनी दलीलें रखने की इजाजत मांगी है।
बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट परिसर में उनकी मौजूदगी के लिए विशेष पास भी जारी किया गया है, जिससे उनके व्यक्तिगत रूप से पेश होने के संकेत मिलते हैं। सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की अध्यक्षता वाली पीठ करेगी, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली भी शामिल होंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री के अलावा तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन, डोला सेन और याचिकाकर्ता मोस्तारी बानू की याचिकाओं पर भी विचार किया जाएगा।
अपनी अंतरिम याचिका में ममता बनर्जी ने कहा है कि वह SIR मामले की याचिकाकर्ता हैं और इससे जुड़े तथ्यों व जमीनी हालात से भली-भांति परिचित हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया और परंपराओं की पूरी जानकारी है और वह सभी नियमों का पालन करते हुए अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखेंगी। मुख्यमंत्री ने तर्क दिया है कि SIR प्रक्रिया के कारण राज्य के लाखों मतदाताओं को व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
इससे पहले ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर SIR प्रक्रिया में मनमानी का आरोप लगाते हुए इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया था। सुप्रीम कोर्ट पहले ही चुनाव आयोग को निर्देश दे चुका है कि SIR प्रक्रिया पारदर्शी हो और मतदाताओं को किसी भी तरह की असुविधा न हो। कोर्ट के अनुसार, करीब 1.25 करोड़ मतदाता “लॉजिकल गड़बड़ियों” की श्रेणी में रखे गए हैं, जिस पर अब सर्वोच्च अदालत की नजर टिकी हुई है।






