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बिहार बजट 2026: आज खुलेगा नीतीश सरकार के वादों का पिटारा

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Bihar Budget 2026: Nitish government's promises will be revealed today.

पटना। आज 3 फरवरी है और आज का दिन बिहार के लिए खास है। क्योंकि आज बिहार के नीतीश सरकार की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट विधानसभा में पेश किया जाएगा. बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की फिर से सरकार बनने के बाद यह पहला बजट होगा. वित्त मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव बजट को पेश करेंगे. बता दें कि चुनाव से पहले औरq चुनाव जितने के बाद नीतीश सरकार की ओर से कई घोषणाएं की गई हैं. कई योजनाओं को लागू किया गया है. सीएम नीतीश कुमार के मुख्य वादों में एक करोड़ नौकरी और रोजगार का वादा किया गया है. ऐसे में इस बार के बजट में नौकरी-रोजगार को लेकर सरकार की तरफ से विशेष व्यवस्था की जा सकता है. वैसे तो बिहार को अभी कई क्षेत्रों में काम करना है। बिहार का प्रति व्यक्ति आय बढ़ा है, लेकिन विकसित राज्यों के मुकाबले अभी काफी कम है. गरीबी और अन्य मानकों में भी बिहार अभी काफी पिछड़ा राज्य है. बिहार के विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने के लिए बिहार बजट का आकार बढ़ाना होगा। हालांकि पिछले एक दशक में बिहार में बजट का आकर बढ़ा है। अगर हम दो दशक पीछे जाते है तो वर्ष 2004-05 में बिहार का बजट मात्र 23 हजार 885 करोड़ था. वही जब नीतीश कुमार ने सत्ता संभाली तब उस समय यानि वर्ष 2005-06 में बिहार का बजट 26328 करोड़ था. नीतीश सरस्जर के आने के बाद साल दर साल इसमें इजाफा होता गया। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025- 26 में यह बजट 3 लाख 17000 करोड़ पार कर गया है. अमूमन 10% से अधिक की वृद्धि हर बार बजट में देखने को मिलती रही है. ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि इस बार भी 10% से अधिक वृद्धि बिहार के इस बजट में दिखेगा.

बता दे कि नीतीश कुमार 2025 से 30 में बड़े बदलाव का वादा करते लेकिन यह पांच साल नीतीश सरकार के लिए आसान नहीं होगा। क्यों कि नीतीश के वादों के सामने कई बड़ी चुनौतियां है। नीतीश सरकार के लिए सबसे बड़ा मुद्दा और चुनौती एक करोड़ नौकरी और रोजगार का है जो चुनाव से पूर्व सबसे बड़ा वादा था। इसे तो पूरा करना ही होगा. इतना ही नहीं यह पहला साल होगा जिसमें कई बड़े फैसले लेने होंगे. इसके अलावा महिला मुख्यमंत्री रोजगार योजना के तहत भी बड़ी संख्या में महिलाओं को दो लाख तक की राशि की मदद करनी है. उसके लिए भी बड़ी राशि की जरूरत पड़ेगी, जिसकी बजट में व्यवस्था करनी होगी. ”94 लाख परिवार जो गरीबी रेखा से नीचे हैं उनके लिए भी बड़ी राशि का इंतजाम इस साल करना होगा। इसके अलावा सात निश्चय पार्ट 3 में भी सरकार ने कई बड़ी घोषणाएं की हैं तो उस सबके लिए भी राशि की जरूरत पड़ेगी. इसलिए इस बार के बजट से विकास को दिशा मिलेगी और सरकार की मंशा का भी पता चलेगा. अनुमान के अनुसार इस बार बजट का आकार साढ़े तीन लाख करोड़ से अधिक का हो सकता…… क्यों कि बिहार को विकसित बनाने के लिए सात निश्चय पार्ट 3 की घोषणा नीतीश कुमार की तरफ से की गई है. इसमें सभी जिले में उद्योगों का जाल बिछाने की घोषणा की गई है.

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ऐसे में उद्योग विभाग का बजट का आकार बढ़ सकता है. स्वास्थ्य को लेकर भी सरकार ने घोषणाएं की है तो स्वास्थ्य विभाग का बजट का आकार भी बढ़ना तय है. बिजली विभाग की बजट की बात करें तो सरकार ने 125 यूनिट फ्री बिजली दी है तो इसके कारण सरकार पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है इसलिए बजट का आकार बढ़ाना पड़ेगा ही पड़ेगा। यह बजट यही खत्म नहीं होता… सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि भी सरकार ने बढ़ाई है. ऐसे में इस बार समाज कल्याण विभाग के बजट का आकार भी बढ़ाना पड़ेगा. केंद्र सरकार ने जी राम जी मनरेगा के स्थान पर संशोधन कर लाया है. ऐसे में ग्रामीण विकास विभाग का बजट भी बढ़ाना पड़ेगा, क्योंकि इसमें बिहार सरकार को 40 प्रतिशत हिस्सेदारी देनी पड़ेगी जो पहले 10 प्रतिशत था। ऐसे में जी राम जी का भी बोझ बढ़ेगा। वही हम शिक्षा विभाग की बात करे तो यह विभाग सरकार के लिए शुरू से ही सर्वोपरि है। शिक्षा विभाग का बजट सबसे बड़ा होता है. ऐसे में इस बार भी बजट का आकार बड़ा होना तय है. इस साल सबसे अधिक नौकरी शिक्षा विभाग में दी है और आगे भी देना है इस लिए इस बार की बजट में उसका भी ध्यान रखा जाएगा. इसके अलावा बिहार में सड़क और पुल निर्माण पर सरकार का विशेष ध्यान है. कई पुल और एलिवेटेड रोड पर काम चल रहा है ऐसे में पथ निर्माण विभाग का बजट का आकार भी बढ़ने की संभावन है।…….. लेकिन अब सवाल उठता है कि इतने बड़े बजट के बाद सरकार अपना राजस्व कहां से बढ़ाएगी। क्यों कि नीतीश कुमार को सरकार के राजस्व बढ़ाने की भी बड़ी चुनौती होगी।….. आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार अपने खर्च का 27% के आस पास ही राजस्व जुटा रहा है.

जबकि विकसित राज्य महाराष्ट्र 70 प्रतिशत राजस्व जुटा रहा है। वही गुजरात 76%, हरियाणा 69% अपना राजस्व जुटा रहा हैं. इसे में सवाल उठता है कि इतने बड़े बजट के बाद इसके लिए बिहार अपना राजस्व कहां से जुटाएंगे। कही न कही इस बार भी बिहार को केंद्र से मिलने वाले राजस्व और अनुदान पर निर्भर रहना होगा. हालांकि सरकार की ओर से राजस्व वसूली में वृद्धि हो रही है लेकिन यह वृद्धि इतने बजट को संभाल लायेगी ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा। बस अब इंतजार है कल सुबह की नीतीश सरकार किस विभाग को कितना मद देते है। इसपर बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश की नजर रहेगी।

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