शिमला : शिमला के पालमपुर निवासी 26 वर्षीय मर्चेंट नेवी अधिकारी रिक्षित चौहान आखिरकार करीब 20 दिनों के तनावपूर्ण इंतजार के बाद सुरक्षित हिमाचल प्रदेश लौट आए हैं। वे उस रूसी तेल टैंकर ‘मेरिनेरा’ पर सवार थे, जिसे 7 जनवरी को अमेरिकी नौसेना ने वेनेजुएला के पास जब्त कर लिया था। इस टैंकर पर तीन भारतीयों समेत कुल 28 चालक दल के सदस्य मौजूद थे। रिक्षित की सुरक्षित वापसी से उनके परिवार और पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई।
घर पहुंचते ही रिक्षित को देखकर उनके माता-पिता भावुक हो गए। मां बेटे को गले लगाकर रो पड़ीं, जबकि परिवार ने भगवान का शुक्रिया अदा करते हुए मिठाइयां बांटीं। पिछले कई दिनों से अनिश्चितता और डर के साए में जी रहे परिवार के लिए यह पल बेहद सुकून भरा रहा। रिक्षित पिछले साल 1 अगस्त को मर्चेंट नेवी में शामिल हुए थे और यह उनका पहला समुद्री कार्य था।
रिक्षित ने बताया कि जब अमेरिकी नौसेना ने जहाज पर नियंत्रण लिया, तो सभी चालक दल के सदस्यों के फोन जब्त कर लिए गए, जिससे परिवारों से संपर्क पूरी तरह टूट गया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों का व्यवहार पेशेवर और मानवीय रहा। सभी का नियमित हेल्थ चेकअप किया जाता था और किसी तरह का दुर्व्यवहार नहीं हुआ।
रिक्षित के पिता रणजीत सिंह ने बेटे की सुरक्षित वापसी पर भारत सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता त्रिलोक कपूर का आभार जताया। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक संपर्क न होने के कारण परिवार को आशंका होने लगी थी कि कहीं उन्होंने अपना बेटा न खो दिया हो। हालांकि 26 जनवरी की रात रिक्षित का फोन आया, जिसमें उसने बताया कि वह यूके में सुरक्षित है और एक होटल में ठहरा हुआ है।
भाजपा प्रवक्ता त्रिलोक कपूर ने बताया कि इस मामले को भारत सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाया गया था। पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और अन्य जनप्रतिनिधियों के प्रयासों से रिक्षित की सुरक्षित वापसी संभव हो सकी। अब परिवार राहत और खुशी के साथ इस कठिन दौर को पीछे छोड़ चुका है।







