पश्चिम बंगाल: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने शुक्रवार को भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी को लेकर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए। यह प्रतिक्रिया उन्होंने कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस आदेश के संदर्भ में दी, जिसमें पश्चिम बंगाल सरकार को सीमा पर बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को आवश्यक भूमि सौंपने का निर्देश दिया गया है। घोष ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार पहले ही बीएसएफ को जमीन सौंप चुकी है और अब जिम्मेदारी पूरी तरह केंद्रीय बल की बनती है।
कुणाल घोष ने कहा कि बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र पहले ही सीमा रेखा से 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया गया है। इसके बावजूद, जिन इलाकों में बाड़ लग चुकी है, वहां से भी लोगों का अवैध रूप से सीमा पार करना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह राज्य पुलिस का विषय नहीं है, बल्कि पूरी तरह बीएसएफ की जिम्मेदारी है कि वह सीमा की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करे।
टीएमसी नेता ने आरोप लगाया कि बाड़बंदी के बावजूद घुसपैठ जारी रहना यह दर्शाता है कि या तो व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं या फिर राजनीतिक कारणों से किसी स्तर पर “हेरेफेरी” की जा रही है। उन्होंने कहा कि बीएसएफ का रवैया इस पूरे मामले में भ्रामक नजर आता है और सच्चाई सामने आनी चाहिए।
हालांकि, कुणाल घोष ने यह भी स्पष्ट किया कि वह उच्च न्यायालय के आदेश पर सीधे कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि अदालत का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत पर सवाल उठाना जरूरी है। गौरतलब है कि कलकत्ता उच्च न्यायालय ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी में हो रही देरी का संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को जल्द से जल्द इस प्रक्रिया को पूरा कराने के निर्देश दिए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 14 फरवरी 2026 को निर्धारित है।







