नयी दिल्ली: दिल्ली महिला आयोग (DCW) के लंबे समय से निष्क्रिय रहने और अध्यक्ष पद रिक्त होने को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में दावा किया गया है कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए जिम्मेदार यह वैधानिक निकाय लंबे समय से अनुपलब्ध और निष्क्रिय है, और शिकायतें प्राप्त करने के लिए कोई सक्रिय हेल्प डेस्क, अधिकारी या कर्मचारी मौजूद नहीं हैं।
जनहित याचिका सांसद सुधाकर सिंह द्वारा दायर की गई है और अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत ने इसका प्रतिनिधित्व किया। याचिका में बताया गया कि DCW का कार्यालय नियमित कार्य समय के दौरान भी बंद रहता है, जबकि अध्यक्ष का पद जनवरी 2024 से रिक्त है। इसके कारण परिवार परामर्श इकाइयों, बलात्कार संकट प्रकोष्ठों, शिकायत निवारण प्रणालियों और अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं का संचालन बाधित हुआ है। याचिकाकर्ता ने कहा कि इस निष्क्रियता से महिलाओं को न्याय, सुरक्षा और आवश्यक संस्थागत सहायता प्राप्त करने में गंभीर परेशानी हो रही है।
याचिका में यह भी दावा किया गया कि DCW की कार्यप्रणाली में यह लापरवाही संविधान के अनुच्छेद 14, 15(3) और 21 का उल्लंघन करती है। दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की उच्च दर को देखते हुए यह स्थिति और भी गंभीर मानी जा रही है। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि आयोग के कामकाज को तत्काल बहाल किया जाए, पर्याप्त कर्मचारियों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए और रिक्त अध्यक्ष पद को निश्चित समय सीमा के भीतर भरा जाए।
साथ ही याचिका में यह सुनिश्चित करने की भी गुजारिश की गई है कि सभी वैधानिक कार्यक्रमों और संस्थागत तंत्र में पर्याप्त स्टाफ हो, ताकि भविष्य में ऐसी गतिरोध की स्थिति न उत्पन्न हो। अदालत से अपेक्षा की जा रही है कि यह मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार को निर्देश दे और महिलाओं को उनकी संवैधानिक सुरक्षा और सहायता दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
यह मामला दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण न्यायिक हस्तक्षेप का संकेत माना जा रहा है।







