
नयी दिल्ली: देश में लगातार सामने आ रहे विमान हादसों ने नागरिक उड्डयन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अहमदाबाद में हुए विमान हादसे के बाद हाल ही में बारामती में हुई घटना ने यह चिंता और गहरा दी है कि क्या देश की एविएशन सेफ्टी सिस्टम बढ़ते हवाई यातायात के अनुरूप मजबूत है या नहीं। इसी कड़ी में संसद में सामने आए आंकड़ों ने व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया है।
सरकार ने संसद को जानकारी दी है कि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) में लगभग 50 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं। DGCA में कुल 1,630 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से 805 पदों पर ही कर्मचारियों की नियुक्ति हो सकी है। यानी आधे से ज्यादा जिम्मेदारियां सीमित स्टाफ के भरोसे निभाई जा रही हैं। यही स्थिति अन्य प्रमुख विमानन संस्थानों में भी देखने को मिल रही है।
एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) में कुल 25,730 स्वीकृत पदों में से केवल 16,011 पदों पर ही नियुक्तियां हुई हैं, जबकि करीब 9,719 पद अब भी खाली हैं। इसी तरह एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) में भी भारी स्टाफ की कमी है। यहां 5,537 पदों के मुकाबले 1,274 पद रिक्त हैं, जो उड़ानों की सुरक्षित आवाजाही के लिहाज से चिंताजनक माना जा रहा है।
विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि सुरक्षा से जुड़े संस्थानों में इतनी बड़ी संख्या में खाली पद होने से निगरानी, निरीक्षण और आपात स्थिति से निपटने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। DGCA की एक आंतरिक समिति ने भी स्टाफ की कमी को गंभीर समस्या बताया है। समिति के अनुसार सीमित संसाधनों और बढ़ती जिम्मेदारियों के चलते DGCA कई बार केवल घटनाओं के बाद कार्रवाई करने की स्थिति में आ जाता है।
समिति ने सुझाव दिया है कि DGCA में जल्द से जल्द नियुक्तियां की जाएं और प्रशिक्षण व्यवस्था को भी मजबूत किया जाए। सरकार ने संसद में भरोसा दिलाया है कि रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया तेज की जाएगी और विमानन सुरक्षा मानकों को और सख्त बनाया जाएगा। अब देखने वाली बात यह होगी कि ये आश्वासन जमीन पर कितनी जल्दी असर दिखाते हैं।






