Home राष्ट्रीय UGC इक्विटी नियम: क्या है नया प्रावधान और क्यों भड़का विरोध?

UGC इक्विटी नियम: क्या है नया प्रावधान और क्यों भड़का विरोध?

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UGC Equity Rules: What is the new provision and why is there protest?

नयी दिल्ली: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए नए ‘इक्विटी नियम, 2026’ को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। ये नियम 2012 और 2019 के पहले के दिशानिर्देशों की तुलना में कहीं अधिक सख्त और बाध्यकारी हैं। इनका उद्देश्य कैंपस में जाति, धर्म, लिंग, दिव्यांगता, जन्म स्थान या सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकना है। रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों के बाद लंबे समय से ऐसे मजबूत ढांचे की मांग की जा रही थी।

नए नियमों के तहत हर उच्च शिक्षण संस्थान में तीन-स्तरीय व्यवस्था अनिवार्य की गई है। इसमें समान अवसर केंद्र, शिकायतों की जांच के लिए इक्विटी समिति और अपील के लिए बाहरी लोकपाल शामिल हैं। इसके अलावा इक्विटी स्क्वाड, इक्विटी एंबेसडर और 24×7 इक्विटी हेल्पलाइन जैसी व्यवस्थाएं भी बनाई गई हैं। सबसे अहम बदलाव यह है कि अब यूजीसी के पास नियमों का पालन न करने वाले संस्थानों पर सीधी कार्रवाई करने की शक्ति होगी। नियम तोड़ने पर संस्थानों को यूजीसी की योजनाओं से बाहर किया जा सकता है या उनकी मान्यता तक रद्द की जा सकती है।

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हालांकि, इन नियमों का विरोध भी सामने आ रहा है। सामान्य वर्ग और कुछ छात्र संगठनों का कहना है कि नियमों में झूठी शिकायतों से बचाव के लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं। भेदभाव की परिभाषा को भी अस्पष्ट बताया जा रहा है, जिसमें ‘अप्रत्यक्ष’ और ‘संरचनात्मक’ भेदभाव जैसे शब्द शामिल हैं। आलोचकों को आशंका है कि इसका दुरुपयोग हो सकता है और आरोपियों के अधिकारों, गोपनीयता या प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है।

यूजीसी का कहना है कि ये नियम सभी वर्गों के लिए समान रूप से लागू होंगे और इनका मकसद किसी को निशाना बनाना नहीं, बल्कि एक सुरक्षित और समावेशी शैक्षणिक माहौल बनाना है। फिलहाल, इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिकाएं दाखिल की गई हैं। ऐसे में अंतिम तस्वीर अदालत की सुनवाई और सरकार की आगे की स्पष्टता के बाद ही सामने आएगी।

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