नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 77 वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर इंडिया गेट स्थित राष्ट्रीय समर स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर देश के शहीदों को नमन किया। इसके साथ ही गणतंत्र दिवस उत्सव का औपचारिक शुभारंभ हुआ। इस समारोह के लिये गार्ड ऑफ ऑनर की कमान एक वायु सेना अधिकारी, स्क्वाड्रन लीडर हेमंत सिंह कन्याल ने संभाली। शहीद नायकों के सम्मान में दो मिनट का मौन रखा गया, जिसके बाद बिगुल बजाने वालों ने ‘राउज’ बजाया। गार्ड कमांडर ने एक बार फिर सलामी शस्त्र का आदेश दिया, जिससे समारोह औपचारिक रूप से समाप्त हो गया। राष्ट्रीय समर स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद प्रधानमंत्री अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ कर्तव्य पथ पर बने मुख्य मंच की ओर रवाना हुए। कर्तव्य पथ पर राष्ट्रपति के आगमन के समय सैन्य बैंड द्वारा राष्ट्रगान की प्रस्तुति दी गई।
सेना की स्वदेशी तोपों से दी गयी राष्ट्रीय ध्वज को सलामी
नयी दिल्ली। कर्तव्य पथ पर सोमवार को 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में सेना की 1721 फील्ड बैटरी (सेरेमोनियल) ने राष्ट्रीय ध्वज को 21 तोपों की पारंपरिक सलामी दी। इसकी एक विशेषता यह रही कि आर्टिलरी बैटरी ने देश में ही बनी 105 मिमी लाइट फील्ड तोपों से फायरिंग कर सलामी दी।गौरतलब है कि गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रीय ध्वज को 21 तोपों की सलामी देना एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक परंपरा है। यह कर्तव्य पथ के लॉन से राष्ट्रीय ध्वज को दिया जाने वाला सर्वोच्च सैन्य सम्मान है। इन तोपों से फायरिंग एक साथ होने वाली तीन गतिविधियों का तालमेल होती है जिसमें प्रोटोकॉल अधिकारी द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराना, सेना बैंड द्वारा राष्ट्रगान बजाना और राष्ट्रपति बॉडीगार्ड द्वारा राष्ट्रीय सलामी देना शामिल है। यह सेरेमोनियल बैटरी दिल्ली में तैनात है और इसकी जिम्मेदारी राष्ट्रीय महत्व के अलग-अलग अवसरों पर पारंपरिक फायरिंग कर सलामी देना है। यह बैटरी 1721 फील्ड रेजिमेंट का हिस्सा है जो मुख्यालय 36 आर्टिलरी ब्रिगेड के तहत आती है। सेरेमोनियल बैटरी ने 21 तोपों की सलामी देने के लिए 105 मिमी लाइट फील्ड गन का इस्तेमाल किया जो स्वदेशी तोप प्रणाली है। पहले यह फायरिंग ब्रिटिश काल की 25 पाउंडर तोप से की जाती थी।यह तोप प्रणाली आत्मनिर्भर भारत में देश की रक्षा निर्माण क्षमता को प्रदर्शित करती है। पहले 21 तोपों की सलामी के लिए ब्रिटिश काल की 25 पाउंडर तोपों का इस्तेमाल किया जाता था। 1721 फील्ड बैटरी (सेरेमोनियल) सेना की एक विशेष इकाई है जो गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों में 21 तोपों की पारंपरिक सलामी देती है। सलामी में ध्वनि और धुएं के लिए विशेष सेरेमोनियल कारतूसों का इस्तेमाल किया जाता है जिससे किसी को नुकसान नहीं होता।
ग्रुप कैप्टन शुक्ला शांतिकाल के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर जाने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री और वायु सेना के जांबाज पायलट ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को 77 वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर शांतिकाल के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया। ग्रुप कैप्टन शुक्ला के साथ गगनयान मिशन के लिए चुने गये वायु सेना के पायलट ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर को भी कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया है। ग्रुप कैप्टन शुक्ला ने पहले भारतीय के रूप में 26 जून को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन जाकर इतिहास रचा था। इससे पहले वायु सेना के विंग कमांडर राकेश शर्मा सोवियत संघ के मिशन में अंतरिक्ष गये थे। ग्रुप कैप्टन शुक्ला को चार सदस्यों वाले भारत के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशन गगनयान के लिए भी चुना गया है। उन्होंने 18 दिन की अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा के दौरान विभिन्न शोध कार्यो में योगदान दिया था। उन्हें लड़ाकू विमानों सहित विभिन्न विमानों को उडाने का दो हजार घंटे से भी अधिक का अनुभव है।
अशोक चक्र भारत का सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है जो सैनिकों और नागरिकों को असाधारण बहादुरी, साहस या सर्वोच्च बलिदान के लिए दिया जाता है।







