- टीबी मुक्त अभियान के तहत 1.52 करोड़ से अधिक उच्च-जोखिम आबादी का मैपिंग
- लगभग 23 लाख टीबी मरीजों की हुई स्क्रीनिंग
पटना। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन के लक्ष्य को लेकर बिहार ने बीते वर्षों में निरंतर प्रतिबद्धता और संगठित प्रयासों के साथ काम किया है। राज्य सरकार की स्पष्ट नीति, तकनीक आधारित हस्तक्षेप और समुदाय-केंद्रित रणनीतियों ने टीबी नियंत्रण की दिशा में ठोस प्रगति का मार्ग प्रशस्त किया है। इन प्रयासों का परिणाम रहा है कि चिन्हित टीबी रोगियों को निक्षय पोर्टल से जोड़कर निःशुल्क जांच, दवाएं, ड्रग-रेजिस्टेंस परीक्षण, ब्लड शुगर एवं एचआईवी जांच तथा उपचार के दौरान पोषण सहायता प्रदान की जा रही है।
श्री पांडेय ने बताया कि टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत राज्य में 1.52 करोड़ से अधिक उच्च-जोखिम आबादी का मैपिंग किया गया, जिसके आधार पर लगभग 23 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग कराई गई। इस सघन अभियान से टीबी की जल्द पहचान संभव हुई और मरीजों को समय पर उपचार से जोड़ा जा सका। उच्च जोखिम युक्त समूहों में आधुनिक जांच तकनीकों और एआई आधारित पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों का उपयोग कर राज्य के 10 जिलों में लक्षणहीन टीबी रोगियों की भी पहचान की गयी । संक्रमण की श्रृंखला तोड़ने के लिए टीबी निवारक उपचार ( 3 एचपी एवं 1 एचपी) जैसी पद्धतियों को राज्यभर में लागू किया गया है। वहीं, सामाजिक सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से निक्षय मित्र पहल के तहत लगभग 37,710 निक्षय मित्रों की भागीदारी से अब तक लगभग 55,016 फूड बास्केट टीबी मरीजों को वितरित किए गए हैं, जिससे उपचार के दौरान पोषण और निरंतरता सुनिश्चित हुई है।
श्री पांडेय ने बताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से बिहार में एआई युक्त डिजिटल एक्स-रे मशीनों का विस्तार किया जा रहा है। इसके साथ ही पटना के अगमकुआं में यक्ष्मा प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण केंद्र का चार मंजिला नया भवन का निर्माण अंतिम चरण में है। यह केंद्र प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और अनुसंधान का प्रमुख हब बनेगा और बिहार को टीबी मुक्त भारत के बड़े राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर और सशक्त रूप से आगे बढ़ाएगा।







