नयी दिल्ली: देश 26 जनवरी को अपना 77वां गणतंत्र दिवस पूरे गर्व और उत्साह के साथ मनाने जा रहा है। इस अवसर पर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर होने वाली गणतंत्र दिवस परेड इस बार कई मायनों में ऐतिहासिक और खास होगी। परेड में भारत की बढ़ती सैन्य ताकत, स्वदेशी तकनीक और तीनों सेनाओं के मजबूत तालमेल की झलक देखने को मिलेगी।
इस वर्ष पहली बार लंबी दूरी तक मारक क्षमता वाली रॉकेट लॉन्चर प्रणाली ‘सूर्यास्त्र’, नवगठित भैरव लाइट कमांडो बटालियन, जांस्कर टट्टू और दुर्लभ बैक्ट्रियन ऊंट परेड का हिस्सा बनेंगे। एक और बड़ी खासियत यह होगी कि प्रतिष्ठित 61वीं कैवलरी के घुड़सवार सैनिक आधुनिक युद्ध सामग्री और स्वदेशी हथियारों से लैस होकर ‘चरणबद्ध युद्ध संरचना’ में मार्च करते नजर आएंगे। इसके साथ ही शक्तिबाण रेजिमेंट भी पहली बार गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होगी, जो ड्रोन और ड्रोन-रोधी प्रणालियों से सुसज्जित है।
इस साल परेड का मुख्य आकर्षण भारतीय सशस्त्र बलों की त्रि-सेवा झांकी होगी, जिसका विषय है—‘ऑपरेशन सिंदूर: जॉइंटनेस के माध्यम से विजय’। यह झांकी थलसेना, नौसेना और वायुसेना के संयुक्त अभियान, सटीक हमलों और आत्मनिर्भर भारत की सैन्य क्षमता को दर्शाएगी। गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत पिछले वर्ष पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था।
परेड में भारतीय सेना की छह मार्चिंग टुकड़ियां शामिल होंगी, जिनमें राजपूत रेजिमेंट, असम रेजिमेंट, जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फैंट्री और भैरव बटालियन प्रमुख हैं। इसके अलावा नौसेना, वायुसेना, अर्धसैनिक बल और दिल्ली पुलिस की टुकड़ियां भी कदमताल करेंगी। टी-90 भीष्म, अर्जुन टैंक, ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश प्रणाली और आधुनिक हेलीकॉप्टर भारत की सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करेंगे।
करीब 6,065 प्रतिभागियों वाली यह परेड आधुनिक, तकनीक-संपन्न और आत्मनिर्भर भारतीय सेना की सशक्त तस्वीर पेश करेगी।







