
मुंबई: मुंबई में शुक्रवार को शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में राजनीति से इतर एक भावनात्मक और प्रतीकात्मक दृश्य देखने को मिला। लंबे समय से अलग-अलग राहों पर चल रहे उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक मंच पर नजर आए और दोनों के बीच दिखी आत्मीयता ने सियासी हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। जिन ठाकरे भाइयों के रिश्ते को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं, उसी रिश्ते की गर्मजोशी ने इस आयोजन को खास बना दिया।
कार्यक्रम के दौरान जब मंच संचालन कर रहे पदाधिकारी ने उद्धव ठाकरे से राज ठाकरे का सम्मान करने की घोषणा की, तो राज ठाकरे चौंक गए। उन्होंने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसा कैसे हो सकता है और मंच पर परंपरा के उलटे क्रम को मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद राज ठाकरे ने खुद आगे बढ़कर उद्धव ठाकरे का सम्मान किया। इस पल ने मंच पर मौजूद लोगों को भावुक कर दिया और तालियों की गूंज सुनाई दी। बाद में शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने राज ठाकरे को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया।
इस पूरे कार्यक्रम में दोनों भाइयों के बीच आपसी सम्मान और सहजता साफ झलकती रही। राज ठाकरे ने खुले तौर पर यह संकेत दिया कि बालासाहेब ठाकरे के बाद परिवार में उद्धव ठाकरे ही वरिष्ठ और प्रमुख भूमिका में हैं। उम्र के लिहाज से भी उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे से आठ साल बड़े हैं—उद्धव की उम्र 65 साल और राज की 57 साल है। यही कारण रहा कि राज ठाकरे ने मंच पर वरिष्ठता को प्राथमिकता दी।
राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे ने भी उद्धव ठाकरे के प्रति आदर जताया, जिससे यह संदेश और मजबूत हुआ कि ठाकरे परिवार में रिश्तों की गरिमा अब भी कायम है। राजनीतिक मतभेदों और चुनावी समीकरणों से इतर, बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी ने दोनों भाइयों को एक साझा भावनात्मक मंच पर ला खड़ा किया, जिसने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नई उम्मीद और चर्चा को जन्म दे दिया है।






