
पटना: 2 फरवरी से शुरू हो रहे बिहार विधानमंडल के बजट सत्र से पहले सियासी सरगर्मियां तेज हैं। सत्र के दौरान जहां एक ओर विपक्ष सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है, वहीं सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियों के साथ जवाब देने के मूड में दिख रहा है। लेकिन इस बार राजनीतिक बहस से अलग एक अनोखा मुद्दा चर्चा में है—विधानसभा के आसपास फैलती दुर्गंध।
दरअसल, पटना के हार्डिंग रोड और रेलवे लाइन के पास, बिहार विधानसभा परिसर से महज 100 मीटर की दूरी पर एक नया कचरा निस्तारण केंद्र विकसित किया जा रहा है। इसके चलते यारपुर और गर्दनीबाग समेत आसपास के करीब दो किलोमीटर के इलाके में रहने वाले लोग पहले से ही आशंकित हैं। लोगों को डर है कि इस केंद्र से निकलने वाली बदबू उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करेगी।
इस बजट सत्र में विधानसभा के 243 और विधान परिषद के 75 सदस्यों सहित करीब 3000 कर्मचारी नियमित रूप से सदन में मौजूद रहेंगे। ऐसे में यह कचरा निस्तारण केंद्र न सिर्फ स्थानीय निवासियों, बल्कि जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों के लिए भी परेशानी का कारण बन सकता है। हालांकि पटना नगर निगम और राज्य सरकार का दावा है कि यहां अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे दुर्गंध नहीं फैलेगी।
सरकारी दावों के बावजूद स्थानीय लोगों का अनुभव कुछ और कहता है। उनका कहना है कि पटना के अन्य कचरा केंद्रों की स्थिति देखकर भरोसा करना मुश्किल है कि यह केंद्र पूरी तरह ‘गंधहीन’ रहेगा। कई इलाकों में पहले से मौजूद कचरा प्रबंधन केंद्रों से उठने वाली बदबू लोगों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बजट सत्र के दौरान यह मुद्दा विपक्ष के लिए सरकार को घेरने का एक नया हथियार बन सकता है। स्वच्छता, स्वास्थ्य और शहरी नियोजन जैसे सवालों पर सरकार को जवाब देना पड़ सकता है। अब देखना यह होगा कि सरकार समय रहते कोई प्रभावी समाधान निकाल पाती है या फिर जनप्रतिनिधियों को भी सत्र के दौरान इस ‘गंध’ का सामना करना पड़ेगा।






