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बुढ़ापे में शिंगल्स वैक्सीन से धीमी हुई जैविक उम्र, Jung Ki Kim की स्टडी में संकेत

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Shingles vaccine slows biological aging in older adults, suggests Jung Ki Kim's study

लाइफ स्टाइल: कभी-कभी किसी आम से लगने वाले कदम का असर उम्मीद से कहीं ज्यादा बड़ा साबित हो सकता है। हालिया एक वैज्ञानिक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने ऐसा ही एक दिलचस्प पैटर्न देखा है। इस रिसर्च के मुताबिक, बुजुर्गों को लगाई जाने वाली शिंगल्स (हर्पीज जोस्टर) वैक्सीन न केवल बीमारी से बचाव करती है, बल्कि शरीर की उम्र बढ़ने की रफ्तार को भी धीमा कर सकती है।

यह अध्ययन अमेरिका के यूएससी लियोनार्ड डेविस स्कूल ऑफ गैरोन्टोलॉजी के शोधकर्ताओं ने किया है, जिसकी प्रमुख लेखिका रिसर्च एसोसिएट प्रोफेसर जंग की किम (Jung Ki Kim) हैं। शोध में यूएस हेल्थ एंड रिटायरमेंट स्टडी के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें साल 2016 के दौरान 70 वर्ष या उससे अधिक उम्र के करीब 3,800 लोगों को शामिल किया गया था। शोध का मकसद यह जानना था कि शिंगल्स वैक्सीन का बायोलॉजिकल एजिंग यानी शरीर की वास्तविक उम्र पर क्या असर पड़ता है।

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स्टडी में यह पाया गया कि अन्य सभी कारकों को नियंत्रित करने के बाद भी शिंगल्स वैक्सीन लगवाने वाले बुजुर्गों की बायोलॉजिकल एज उन लोगों की तुलना में धीमी गति से बढ़ी, जिन्होंने यह टीका नहीं लिया था। बायोलॉजिकल एज का मतलब है कि शरीर के अंग और कोशिकाएं किस उम्र के अनुसार काम कर रही हैं, जो कई बार वास्तविक उम्र से अलग हो सकती है।

जंग की किम के अनुसार, यह नतीजे पहले हुए उन अध्ययनों को और मजबूती देते हैं, जिनमें बताया गया था कि शिंगल्स और फ्लू जैसी वैक्सीन न केवल संक्रमण से बचाती हैं, बल्कि डिमेंशिया और अन्य न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों के जोखिम को भी कम कर सकती हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि वैक्सीन शरीर के अंदर होने वाली सूजन (इंफ्लामेशन) को कम करती है, जो एजिंग की प्रक्रिया को तेज करने वाला एक बड़ा कारण मानी जाती है।

हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि इस असर के पीछे के सटीक कारणों को समझने के लिए और रिसर्च की जरूरत है। फिर भी, यह अध्ययन इस ओर इशारा करता है कि शिंगल्स वैक्सीन बुजुर्गों को लंबे समय तक स्वस्थ और सक्रिय जीवन जीने में मदद कर सकती है।

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