मुज्जफरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर की एक अदालत में डीएमके सांसद दयानिधि मारन के खिलाफ परिवाद दायर किया गया है। यह मामला उनके उस विवादित बयान से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने उत्तर भारत की महिलाओं की तुलना दक्षिण भारत की महिलाओं से करते हुए आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। चेन्नई सेंट्रल से चार बार सांसद रह चुके मारन ने कथित तौर पर कहा था कि उत्तर भारत की महिलाएं मुख्य रूप से घरेलू कामकाज और बच्चों की देखभाल तक सीमित रहती हैं, जबकि तमिलनाडु की महिलाएं पढ़ी-लिखी, कामकाजी और हर क्षेत्र में सक्षम हैं। उनके इस बयान को लेकर उत्तर भारत के कई हिस्सों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है।
मुजफ्फरपुर के अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने इस टिप्पणी को महिलाओं के सम्मान के खिलाफ बताते हुए कोर्ट में याचिका दायर की है। परिवाद में आरोप लगाया गया है कि दयानिधि मारन ने जानबूझकर उत्तर भारत की महिलाओं को नीचा दिखाने और दक्षिण भारत की महिलाओं को श्रेष्ठ बताने की मंशा से यह बयान दिया, जिससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हुआ है। अधिवक्ता के अनुसार, यह बयान न केवल भेदभावपूर्ण है बल्कि महिलाओं की गरिमा को भी ठेस पहुंचाने वाला है।
कोर्ट में दायर परिवाद में सांसद के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं—74, 75/79, 192, 251(बी), 298 और 352—के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। अदालत ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए मामले की सुनवाई के लिए 22 जनवरी की तिथि निर्धारित की है। इस प्रकरण के बाद राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मारन के बयान की कड़ी निंदा की है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।







