पुणे: हाल ही में संपन्न पुणे नगर निगम (PMC) चुनावों के शुरुआती रुझानों से पता चलता है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शहर में मजबूत स्थिति में है। शुरुआती रुझानों के अनुसार भाजपा 49 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) केवल 6 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। कांग्रेस इस बार किसी भी सीट पर बढ़त हासिल नहीं कर पाई है। यह चुनाव पवार परिवार के गढ़ में संपन्न हुआ, जहां अजित पवार और शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने गठबंधन कर चुनाव लड़ा था। हालांकि, अजित पवार के भाजपा से अलग होने और वोट बैंक बंटने के कारण यह गठबंधन एनसीपी के लिए अपेक्षित एकजुटता नहीं ला सका।
पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में हुए चुनावों में पिछले चुनाव 2017 में हुए थे। केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल नवंबर 2019 तक पुणे के महापौर रहे थे। भाजपा की बढ़त ने शहर में उसकी मजबूत पकड़ को स्पष्ट किया है और विपक्षी दलों के लिए चुनौती बढ़ा दी है। एनसीपी और कांग्रेस दोनों ही इस बार अपनी भूमिका सीमित रख पाई हैं।
इस बीच, मुंबई में बीएमसी चुनावों के शुरुआती रुझानों के अनुसार भाजपा-शिवसेना महायुति गठबंधन लगभग 69 वार्डों में आगे चल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार भाजपा 49 सीटों पर, शिवसेना 26 सीटों पर आगे है। शिवसेना (यूबीटी) 40 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) 8 सीटों पर आगे है। कांग्रेस 7 सीटों पर और अजित पवार के एनसीपी गुट को 1 सीट पर बढ़त मिली है।
बीएमसी की 227 सीटों के लिए मतगणना जारी है और शुरुआती रुझानों में भाजपा ने अपने मजबूत स्ट्राइक रेट से स्थिति साफ कर दी है। यह चुनाव महाराष्ट्र और पुणे में राजनीतिक समीकरणों को बदल सकता है और आगामी स्थानीय प्रशासन और विकास योजनाओं पर असर डाल सकता है। कुल मिलाकर भाजपा ने अपने प्रत्याशियों के दम पर दोनों नगर निगमों में शुरुआती बढ़त बना ली है, जबकि एनसीपी और कांग्रेस को पिछड़ा हुआ देखा जा रहा है।







