
नई दिल्ली: सेना दिवस पर आयोजित भव्य परेड में भारत ने अपनी स्वदेशी सैन्य ताकत का प्रभावशाली प्रदर्शन कर पूरी दुनिया को संदेश दिया कि देश भविष्य के युद्धों के लिए पूरी तरह तैयार है। समारोह के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल, टी-90 और अर्जुन टैंक, बीएमपी-2, स्मर्च और पिनाका रॉकेट सिस्टम, के-9 वज्र, धनुष तोप, आकाश मिसाइल प्रणाली के साथ अत्याधुनिक ड्रोन, रोबोटिक म्यूल्स और मानवरहित हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन किया गया। ऑपरेशन सिंदूर में उपयोग की गई प्रणालियां भी इस परेड का प्रमुख आकर्षण रहीं।
78वें सेना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना भविष्य के युद्धों की बदलती प्रकृति को ध्यान में रखकर अपनी रणनीति और संरचना को नया रूप दे रही है। उन्होंने कहा कि स्वदेशीकरण अब केवल नीतिगत लक्ष्य नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की रणनीतिक अनिवार्यता बन चुका है। आने वाले वर्षों में भारत में निर्मित हथियार और उपकरण सेना की रीढ़ साबित होंगे।
जयपुर में आयोजित कार्यक्रम में जनरल द्विवेदी ने बताया कि आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुरूप भैरव बटालियन, अश्नि प्लाटून, शक्तिबाण रेजिमेंट और दिव्यास्त्र बैटरी जैसी नई इकाइयों का गठन किया गया है। इन इकाइयों को उन्नत तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन युद्ध और नेटवर्क आधारित अभियानों के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि भारतीय सेना हर मोर्चे पर देश की संप्रभुता की रक्षा करने में सक्षम है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस अवसर पर सैनिकों के शौर्य और समर्पण को नमन किया। उन्होंने सोशल मीडिया संदेश में कहा कि भारतीय जवान कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अडिग रहकर देश की रक्षा करते हैं और उनका साहस पूरे राष्ट्र को प्रेरित करता है। सेना दिवस का यह आयोजन न केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन था, बल्कि आत्मनिर्भर भारत और मजबूत रक्षा तंत्र की प्रतिबद्धता का भी प्रतीक बना।






