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तेजस्वी की चुप्पी के मायने क्या? राजद के ‘मंथन काल’ के पीछे का गेम प्लान

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What does Tejashwi's silence mean? The game plan behind RJD's "brainstorming period"?

पटना: राजनीति में कोई हनीमून टाइम नहीं होता। जो लोग तेजस्वी यादव की चुप्पी को हनीमून टाइम मान रहे हैं, वे अपने ही आंखों में धूल झोंक रहे हैं। राजनीति में इसे मंथन काल कहा जाता है। चुनावी जंग में मिली जबरदस्त हार के बाद तो मंथन करने के लिए कई मुद्दे होते हैं। तेजस्वी यादव की चुप्पी में इन तमाम मुद्दों के समझने का संघर्ष छिपा है। राजनीति में सामाजिक समीकरण के हिसाब से तेजस्वी यादव नंबर वन पार्टी राष्ट्रीय जनता दल में नई सीरत और नई सूरत पर मंथन कर रहे हैं। राजद सूत्रों की बात करें तो तेजस्वी यादव उन सारे मुद्दे पर मंथन कर अपनी राय भी कायम कर ली है। तेजस्वी यादव गठबंधन धर्म और साथी दलों को लेकर एक निष्कर्ष पर पहुंच भी गए हैं। साथी दलों की ताकत का मूल्यांकन भी नए सिरे से किया है। वर्ष 2025 विधानसभा चुनाव में ये आरोप भी लगे थे कि महागठबंधन के साथी दलों की एकजुटता बूथ स्तर पर नहीं दिखी। इसके कारण महागठबंधन के आधार वोट में बिखराव देखा गया। आगामी चुनाव से पहले गठबंधन के साथी दल के कार्यकर्ताओं को साथ लेकर सत्ता के कार्यों जमीनी स्तर पर मूल्याकंन करना है।

जनता तक जिन योजनाओं की पहुंच नहीं हो रही है, उसे चिन्हित करना और फिर सामूहिक विरोध कर जनता के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज करानी है। राजद सूत्रों के अनुसार अभी सबसे हॉट मुद्दा आधी आबादी को मिला 10 हजार रुपए है। राजद की निगाहें इस पर है कि सरकार कितनी महिलाएं को दो लाख व्यवसाय के लिए देती है। इस योजना की असफलता को राजद अपनी वापसी का मजबूत आधार बनाएगी। इसके अलावा भी राजद का ध्यान नौकरी और रोजगार पर टिकी है। वादे के अनुसार काम नहीं हुआ तो इसे भी सत्ता के विरुद्ध अभियान से जोड़ कर जनता के बीच भंडाफोड़ कार्यक्रम भी चलाएगी। तेजस्वी यादव इस खाली समय में परिवार के बीच आई दूरियों का सकारात्मक और नकारात्मक पक्ष पर भी मंथन किया होगा। तेजस्वी यादव परिवार के सभी भाई-बहन के बीच एकजुटता का पैगाम पहुंचाने के बारे में भी मंथन कर चुके होंगे। तेजस्वी यादव इस ताने से भी मुक्त होना चाहेंगे कि जो अपना परिवार नहीं चला सकता वो राज्य को कैसे चला पाएगा?

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तेजस्वी यादव आगामी चुनाव से पहले परिवार के मसले पर एकजुटता का संदेश देने को काफी प्रयास भी करेंगे। राजद के भीतरखाने में संगठन में बड़े फेरबदल का संदेश निकलकर आ रहा है, ये उसी मंथन से निकला अमृत संदेश है। मिली जानकारी के अनुसार राज्य संगठन के सारे स्वरूप के साथ 14 फरवरी के बाद बैठक करेंगे। इस बैठक में विधासनसभा चुनाव 2025 में पार्टी के प्रदर्शन को लेकर पंचायत स्तर तक के पदाधिकारियों का गिला-शिकवा सुनेंगे। इस बैठक में मिली हार पर भी पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों की राय ली जाएगी। इसके बाद संगठन में किस तरह के और किस स्तर के परिवर्तन होंगे, इस पर नीतिगत निर्णय लिया जाएगा। तेजस्वी यादव के मंथन काल में प्रदेश संगठन का स्वरूप लगभग तय है। पदाधिकारियों की बैठक में अपने द्वारा लिए गए निर्णय का एक तरह साक्ष्य जुटाएंगे। ताकि पार्टी के भीतर कोई विरोध की स्थिति नहीं पैदा हो।

प्रदेश अध्यक्ष के बदलाव को लेकर मन भी बना लिया गया है। बस सामूहिकता का मोहर लगाना शेष रह गया है। तेजस्वी यादव का ध्यान विशेषकर उन जिलों पर है, जहां उनके गढ़ उखड़ गए। उन जिलों में काफी सांगठनिक बदलाव दिखेंगे। यूरोप का दौरा दरअसल नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के लिए मंथन काल रहा है। जहां काफी एकाग्रता के साथ हार के कारणों पर चिंतन मनन किया है। ये नए सिरे से राजनीत में आगे बढ़ने का ये बैकअप काल है। इस काल में हार-जीत, दोस्त-दुश्मन, संगठन, भीतरघात जैसे सारे मुद्दे पर मंथन होता है। तेजस्वी यादव इसी रास्ते पर चल रहे हैं। राज्य के अजेय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कोई समय नहीं। परन्तु उनके समय के आगे संकट खड़ा करने के इल्म पर काम जरूर कर रहे हैं।

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