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रिक्शा चालक की बेटी अंशु बनी मिसाल, टी स्टॉल चलाकर बच्चों को सिखा रही क्रिकेट

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Rickshaw puller's daughter Anshu sets an example, running a tea stall and teaching children cricket.

सुपौल/नोएडा: बिहार के सुपौल जिले की बेटी अंशु कुमारी इन दिनों नोएडा में चर्चा बटोर रही है। हालांकि बिहार की तंग गलियों से निकलकर नोएडा के क्रिकेट मैदान तक का सफर अंशु कुमारी के लिए कांटों भरा रहा। अंशु के पिता रिक्शा चलाकर परिवार पालते थे, लेकिन बीमारी ने उन्हें छीन लिया।आर्थिक तंगी के कारण अंशु की पढ़ाई और प्रैक्टिस भी रुक गई। इसी बीच एक कोच ने अंशु को नोएडा में मुफ्त क्रिकेट ट्रेनिंग का सपना दिखाया। अंशु ने अपनी मां के साथ बिहार छोड़ दिया और नोएडा ट्रेनिंग के लिए पहुंच गईं।

हालांकि नोएडा पहुंचते ही अंशु कुमारी के ‘पैरों के नीचे की जमीन’ उस वक्त खिसक गई, जब मुफ्त क्रिकेट ट्रेनिंग का वादा करने वाला कोच अपने वादे से मुकर गया। धोखे और आर्थिक दबाव ने अंशु के हौसलों को डिगाया नहीं, बल्कि और मजबूत कर दिया। अंशु कुमारी को अपना क्रिकेट अभ्यास जारी रखने के लिए पैसों की जरूरत थी। लिहाजा अंशु ने खुद हिम्मत जुटाई और 20 हजार रुपये जमा कर चाय का ठेला लगाना शुरू किया। अंशु सुबह जल्दी उठकर चाय का ठेला संभालती और दोपहर की चिलचिलाती धूप में क्रिकेट की प्रैक्टिस करती। शाम को फिर से चाय बेचती। यहीं अंशु की दिनचर्या बन गई। अंशु आज सिर्फ अपने सपने के लिए नहीं जी रही हैं, बल्कि दूसरों के सपनों को भी पंख दे रही हैं।

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वह वर्तमान में नोएडा में अपनी अंशु क्रिकेट एकेडमी चला रही है। इसमें फीस देने में असमर्थ 22 बच्चों को मुफ्त ट्रेनिंग दिलवा रही है। इसमें पूरा खर्च अंशु कुमारी उठा रही है। इसमें कोच की सैलरी, मैदान का किराया और खेल उपकरण शामिल हैं। अंशु कुमारी ने अपने क्रिकेट खेलने के बारे में बात करते हुए बताया कि ‘भाई के साथ एक बार मैच खेल रही थी। उस समय मैंने इतनी तेज बॉल फेंकी कि भाई हैरान हो गया। भाई ने कहा कि तू क्रिकेट खेल। तभी से क्रिकेट खेलना शुरू किया, लेकिन हालातों ने साथ नहीं दिया।’ अंशु कुमारी बताती हैं कि वह आज भी 110 किमी/घंटा की रफ्तार से गेंदबाजी करती हैं। उनका एकमात्र लक्ष्य भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी पहनना है।

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