पटना: जनता दल यू के सांगठनिक ढांचा को नए रूप की शुरुआत के साथ ही राजनीतिक गलियारों में ये चर्चा शुरू हो गई कि पार्टी का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा। वैसे भी जदयू में 2025 से 2028 के लिए सदस्यता अभियान की शुरुआत हो चुकी है। इस सदस्यता अभियान के दरमियान चल रही चर्चा में राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष के बदले जाने के तो संकेत हैं ही साथ ही संगठन के अन्य पदों पर भी भर्ती फेर बदल होने के संकेत मिलने लगे हैं। महाराष्ट्र के कपिल पाटिल की चर्चा जदयू के नए कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में चल रही है। इस चर्चा को इसलिए ज्यादा बल इसलिए बना कि कुछ ही दिन पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनकी मुलाकात हुई। कपिल पाटिल लंबे समय तक जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय महासचिव रहे हैं। वे पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और गुजरात और गोवा के प्रभारी के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।
वे महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य रहे हैं। उन्होंने मुंबई शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और वे लगातार तीन बार यानी 2006, 2012 और 2018 के चुनाव में जीत दर्ज की थी। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कपिल पाटिल को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बना कर एक साथ कई दिक्कतें हल कर लेना चाहते हैं। एक तो ये महाराष्ट्र से हैं। इसलिए इनके विरुद्ध जदयू के बिहार के नेताओं में कोई गोलबंदी नहीं होगी। इसके पहले आरसीपी सिंह और राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह को ले कर भी पार्टी के अंदर गोलबंदी हो गई थी। फिलहाल तो जदयू के भीतर सबसे बड़ा संकट पार्टी के अस्तित्व को बनाए रखने को ले कर है। जदयू के भीतर बढ़ती मठाधीशी के कारण मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी चिंतित हैं। कपिल पाटिल को कार्यकारी अध्यक्ष बना कर नीतीश कुमार इस चिंता से मुक्त हो जाएंगे कि कहीं जदयू का बीजेपी में विलय न हो जाए। कपिल पाटिल वैसे भी बीजेपी की नीतियों के विरोधी है। इस वजह से ही साल 2024 में जब नीतीश कुमार ने महागठबंधन छोड़ NDA के साथ सरकार बनाई तो उन्होंने जदयू की सदस्यता से ही इस्तीफा तक दे दिया था। ऐसे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए इस खास समय में एंटी बीजेपी चेहरा ही चाहिए।
राजनीतिक गलियारों में जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार की भी चर्चा है। इन दिनों सामाजिक कार्यों में बढ़ती भागीदारी और सरकार के कार्यों के उल्लेख करते रहने से यह माना जा रहा है कि राजनीति में इनकी एंट्री होगी और वह भी सांगठनिक ढांचे के तहत। इसलिए निशांत को कार्यकारी अध्यक्ष बना कर नीतीश कुमार अपने संरक्षण में समाज और राजनीति का पाठ पढ़ाएंगे। लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा तेज है कि नीतीश कुमार ऐसा नहीं करेंगे। संगठन में उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बना कर पूरे बिहार का दौरा कराएंगे और फिर बाद में राष्ट्रीय अध्यक्ष बना सकते हैं। संजय झा की इमेज बीजेपी समर्थक की बन गई है। वैसे भी वो बीजेपी से ही जदयू में आए हैं। विधासनसभा चुनाव 2025 में ही उनकी भूमिका को ले कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार काफी नाराज थे। उनके मनोनुकूल न तो शीट शेयरिंग हो पाई और न ही विधानसभा सीट का सिलेक्शन ही। तब सीएम नीतीश कुमार काफी नाराज भी हुए थे। तभी से संजय झा का ग्राफ गिरा और वो सीएम नीतीश के करीब भी नहीं दिखने लगे।







