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विजय सिन्हा के ‘डैशिंग अवतार’ से सियासी हलचल, भू-माफिया व अफसर निशाने पर

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Vijay Sinha's dashing avatar creates political stir, targets land mafia and officials

पटना: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग काजल की कोठरी है, तो जनता के बीच लोकप्रिय होने के तमाम लटके झटके भी मौजूद हैं। यह एक ऐसा विभाग है, जिससे शायद ही कोई खेतिहर परिवार त्रस्त न हो। इस उत्पीड़न और भ्रष्टाचार का केंद्र ब्लॉक बनता रहा है। जिस तरह से न्यायालय में पेशकार की पेशगी जायज की तरह ली जाती है, ब्लॉक भी हर काम के लिए बतौर पेशगी वाली परंपरा पर चल पड़ा है। बगैर रिश्वत दिए कोई काम नहीं होता। उप-मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा की नजर में ये पीड़ित जनता (एक विशाल वर्ग) राज्य की सबसे बड़ी फौज है, जिसे अब कुछ रिश्वत के ‘जकड़न’ से छूटने की उम्मीद बनी है। ब्लॉक जाइए तो जमीन का रसीद काटना हो, परिमार्जन करना हो या फिर दाखिल खारिज, वहां के बाबू हर काम का दर तय किए हुए हैं। इस तय दर के साथ चले और रिश्वत नहीं देंगे की जिद्द पर चले तो इतने चक्कर लगाने पड़ेंगे कि आने जाने के पैसे तो खर्च होंगे, ब्लॉक में चप्पल तक घिस जायेंगे। ऐसे अधिकारियों के साथ कड़ाई की भाषा का प्रयोग करना और उससे भी ज्यादा ऐसे अधिकारियों को संघ की शरण में जाने से राज्य की जनता बेहद खुश है।

आज सोशल मीडिया पर उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा की जयकारे लगाए जा रहे हैं। ऐसे लोगों के नाम को देखेंगे तो यह लगभग सभी समुदाय को हैं, जो उप-मुख्यमंत्री के शहीदाना अंदाज में जमीनी समस्या का समाधान भी देख रहे हैं। माहौल इस कदर बन गया है कि संघ हड़ताल पर गया तो उस से ज्यादा की संख्या में जनमानस उनके विरुद्ध उमड़ जाएगा। लोकतंत्र के आदमी उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा जनता की ताकत समझते हैं। उनका यह अंदाज उन्हें एक जिला से पूरे राज्य का भी और एक जाति से इतर तमाम जाति के पीड़ितों का चहेता बना दिया। अब तो नारेवाजी होने लगी है कि विजय सिन्हा तुम मत घबराना। यह तब हो रहा है जब अभी चंद जिलों में कार्यशाला लगा है। लखीसराय से शुरू हुआ यह सफर आज सहरसा में नई इबारत गढ़ रहा है। राजनीत की दृष्टि से यह उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के व्यक्तित्व में आमद ही माना जाएगा। भू-माफियाओं से तो बिहार पूरा परेशान हो गया है। न जाने कितनी विधवाओं, गरीबों की जमीन बल के आधार पर कब्जा कर लिया और बाद में चंद रुपयों देकर विदा भी कर दिया। ऐसे किस्से राज्य के हर ब्लॉक में कम या अधिक अखबारों के माध्यम से भी आते रहे हैं। उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा का भू-माफियाओं के विरुद्ध ऐलान ने भी राज्य की जनता को आकर्षित किया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट करते हुए कहा है कि ‘खनन और शराब माफिया की तर्ज पर अब हर जिले में भू-माफिया की सूची तैयार की जा रही है।

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इस सूची के आधार पर फर्जी कागजात के सहारे जमीन कब्जाने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।’ उनकी यह टिप्पणी वायरल हो रही है। यह इस बात की ओर इशारा भी करता है कि पीड़ितों की एक बड़ी फौज है। जनता के संस्थान हासिल करने में भी यह एक बड़ा टूल्स बन गया है। बिहार में फर्जी दस्तावेज का भी बड़ा खेल होता है। खास कर वहां, जहां जमींदारी थी। जमींदार भले मर गए, पर उनके नाम से हुक्मनामा बनाने वालों का एक भाग भू-माफिया राज्य में सक्रिय है। ऐसे लोगों के विरुद्ध उप-मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा का बिगुल फूंकना भी इनकी लोकप्रियता का कारण बन गया है। डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि जो लोग जाली दस्तावेज, गलत दाखिल-खारिज और नियमों की अनदेखी कर जमीन पर कब्जा कर रहे हैं, वे अब कानून के शिकंजे से नहीं बच पाएंगे। उन्होंने कहा कि जमीन से जुड़े अपराधों ने आम लोगों की परेशानी बढ़ाई है और सरकार इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी। उप-मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा की लोकप्रियता का ग्राफ इसलिए भी बढ़ गया है कि भू-माफियाओं के साथ साथ अफसरों को भी टारगेट किया है। विजय सिन्हा ने तो साफ कहा है कि माफियाओं से मिलीभगत कर गलत दस्तावेज तैयार करने वाले अफसर और कर्मचारी भी नहीं बख्शे जाएंगे। चाहे वह राजस्व कर्मी हों, अंचल कार्यालय से जुड़े अधिकारी हों या किसी भी स्तर के कर्मचारी-सबकी भूमिका की जांच होगी और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई तय है।

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