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कॉरपोरेट की नई पसंद बनी चिराग की LJP-R, नीतीश की JDU को भी मिला फायदा

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Chirag's LJP-R becomes the new choice of corporates, Nitish's JDU also benefits

पटना: चुनाव लड़ने के लिए पार्टी फंड एक महत्वपूर्ण फैक्टर तो है ही, साथ ही इसका दूसरा सिरा इस बात से जुड़ता है कि किस दल में सरकार बनाने की क्षमता ज्यादा है या कम है। इसका मूल्यांकन करने के लिए बड़ी-बड़ी कंपनियां और उद्योगपतियों के अपने सोर्स होते हैं। यह और बात है कि बड़े उद्योगपति या कंपनी संभावित विपक्ष के खाते में भी रकम डालती हैं, पर यह सत्ता पक्ष से कम होता है। वर्ष 2024-25 की बात करें तो बिहार के क्षेत्रीय पार्टी में नीतीश कुमार की पार्टी जदयू की फंडिंग में काफी उछाल आया है, पर लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास एक नई सशक्त पार्टी के रूप में उभरी है। रकम की बात करें तो जेडीयू को 18.69 करोड़ तो चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 11 करोड़ रुपये मिले हैं। जदयू की विश्वसनीयता बढ़ी है। वर्ष 2020 विधानसभा चुनाव में मिली भारी शिकस्त के बीच नीतीश कुमार की जदयू के बिखर जाने की चर्चा परवान पर रही। तब जेडीयू के मात्र 43 विधायक थे। पहली बार जेडीयू राज्य की तीसरे नंबर की पार्टी बनी। नतीजतन जदयू के खाते में फंडिंग बहुत कम हुई। जदयू से मिली जानकारी के अनुसार, पार्टी को वर्ष 2023-2024 में करीब 1.81 करोड़ रुपये का चंदा मिला था। मगर जदयू की साख वर्ष 2024 लोकसभा चुनाव में काफी बढ़ गई।

तब राजनीतिक विश्लेषक महज 5 से छह सीट दे रहे थे, उस जदयू को 12 सीटें मिली थी। यहां से पार्टी की जबरदस्त मार्केटिंग व्यवसायियों, उद्योगपतियों के बीच हुई। यही वजह है कि सत्ताधारी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) पर वित्तीय वर्ष 2024-25 में उद्योगपति, कंपनिया और व्यवसाई काफी मेहरबान हुए। नतीजतन वर्ष 2024-25 में जदयू के खाते में 18.69 करोड़ रुपये जमा हुए। गत वर्ष से तुलना करे तों महज एक साल में जेडीयू की फंडिंग में करीब 932 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इन पैसों में सबसे बड़ा हिस्सा इलेक्टोरल ट्रस्ट से आया है। पार्टी को प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट से 10 करोड़ रुपये प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट से 5 करोड़ रुपये और समाज इलेक्टोरल ट्रस्ट एसोसिएशन से 2 करोड़ रुपये मिले हैं। चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास) की पार्टी फंड में 11 करोड़ आना राज्य की राजनीति में आया परिवर्तन की नजर से देखा जा रहा है। लोजपा रामविलास एक अधिक शक्तिशाली पार्टी के रूप में उभर कर आई तो है और उसका चुनाव में भी स्ट्राइक रेट काफी बेहतर है। ये कहना गलत नहीं होगा कि दलित नेता रामविलास पासवान की पार्टी की विश्वसनीयता को चिराग पासवान ने उनसे कुछ आगे ही ले जाने का काम किया है। एक आंकड़े के अनुसार, वर्ष 2004-2005 से वर्ष 2014-2015 तक लोक जनशक्ति पार्टी को चंदा में 7 करोड़ ही मिले थे।

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तब राजद को 23 करोड़ मिले थे। लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष रामविलास पासवान की मृत्यु के बाद लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने पार्टी को न केवल जमीन पर मजबूत किया, बल्कि अपने ज्यादा से ज्यादा नेताओं को सदन भेजने में भी कामयाब हुए। चिराग पासवान के नेतृत्व में पहला चुनाव लोजपा रामविलास ने वर्ष 2020 का लड़ा। तब चिराग पासवान ने 134 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारे। यह दीगर कि पार्टी महज एक सीट जीत सकी, पर उनके दर्जन भर उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहे और सबसे बड़ी खासियत यह रही कि जिस उद्देश्य के साथ वे चुनाव में उतरे थे, वह पूरा हुआ। वर्ष 2020 विधानसभा चुनाव में जदयू के जबरदस्त हार की वजह लोजपा (रामविलास) बनी। वर्ष 2024 में चिराग पासवान की कद्र न केवल बिहार की जनता, बल्कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नजरों में बढ़ी। लोजपा (रामविलास) पांच सीटों पर लड़ी और 100 फीसदी परिणाम देते हुए सभी पांच सीटें जीत ली। पीएम नरेंद्र मोदी के ‘हनुमान’ बने चिराग पासवान की कद्र तमाम उद्योगपतियों और कंपनियों की नजर में बड़ी। यही वजह भी है कि जिस लोजपा (रामविलास) को 10 वित्तीय वर्ष में कुल 7 करोड़ पार्टी फंड में आया, वह एक वित्तीय वर्ष 2024-2025 में बढ़ कर 11 करोड़ पहुंच गया। वर्ष 2025 विधानसभा चुनाव में भी चिराग पासवान का नेतृत्व जमकर उभरा। एनडीए के लिए एक जरूरत बनकर लोजपा (आर) उभरी। तमाम विरोध के बावजूद लोजपा (आर) को गठबंधन में 29 सीटें मिली और उनमें 19 सीटों पर जीत मिली। राजद के कई किले ध्वस्त हुए। इस जीत के बाद लोजपा (रामविलास) राज्य की चौथी बड़ी पार्टी बनी। कांग्रेस को काफी पीछे कर अपना एक बड़ा कद बिहार की जनता के बीच रखा भी।

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