Home बिहार माइक्रो फाइनेंस का कहर: कर्ज के जाल में फंसती गरीबों की जिंदगियां

माइक्रो फाइनेंस का कहर: कर्ज के जाल में फंसती गरीबों की जिंदगियां

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The scourge of microfinance: The lives of the poor trapped in debt

मुजफ्फरपुर: ‘राज्य में सालों से चल रहे अवैध गुंडा बैंक का पूरी तरह अंत किया जाएगा। जिन लोगों ने सूद पर पैसा देकर मनमाना ब्याज वसूला, लोगों को जमीन गिरवी रखने को मजबूर किया और डर का माहौल बनाया, अब ऐसी व्यवस्था को किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बिहार में अब वही बैंक चलेंगे जिन्हें RBI ने मंजूरी दी है। सरकार का फोकस सिर्फ अवैध उधारी पर रोक नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था को टेक्नोलॉजी से जोड़ने पर भी है। राज्यभर में बड़े पैमाने पर AI आधारित कैमरे लगाए जा रहे हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी पहले से मजबूत होगी।’ उपरोक्त बयान प्रदेश के गृहमंत्री सम्राट चौधरी ने सात दिन पहले एक कार्यक्रम के दौरान दिया। उन्होने साफ कहा कि गुंडा बैंक पर एक्शन लिया जाएगा। इन्हें किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, उनके इस बयान के बाद क्या कार्रवाई होती है, ये अभी देखने की बात होगी। लेकिन मुजफ्फरपुर जिले में हालात बहुत नाजुक हैं। बिहार का मुजफ्फरपुर जिला इन दिनों एक अदृश्य लेकिन बेहद खौफनाक आतंक के साये में है। यहां माइक्रो-फाइनेंस कंपनियों के भेष में गुंडा बैंक सक्रिय हैं, जिनका मुख्य काम गरीब और लाचार लोगों को ऊंचे ब्याज दरों पर कर्ज देना और फिर वसूली के नाम पर उन्हें मौत के दरवाजे तक धकेल देना है।

ये अवैध वित्तीय संस्थाएं न केवल कानून की धज्जियां उड़ा रही हैं, बल्कि इनकी प्रताड़ना के कारण जिले में आत्महत्याओं का सिलसिला शुरू हो गया है। स्थिति कितनी भयावह है, इसका अंदाजा जिले के एक ब्लॉक में हुई आत्महत्या की घटनाओं से पता चलता है। कहानी आपको अंदर तक झकझोर देगी। सबसे पहले सकरा ब्लॉक आपको लेकर चलते हैं। जिले का सकरा ब्लॉक इस अवैध धंधे का केंद्र बन गया है। रिपोर्ट के अनुसार, अकेले इस ब्लॉक में लगभग 80 गैर-बैंकिंग कंपनियां काम कर रही हैं, जिनमें से अधिकांश के पास वैध लाइसेंस तक नहीं है। हाल ही में नवलपुर मिश्रौलिया गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना घटी, जहां एक मजदूर की पत्नी दीपा ने कर्ज वसूली के दबाव में आकर अपनी दो मासूम बेटियों के साथ आत्महत्या कर ली। दीपा ने ‘भारत फाइनेंस’ और ‘एसकेएमएस माइक्रो फाइनेंस’ जैसी संस्थाओं से कर्ज लिया था। पड़ोसियों का कहना है कि वसूली एजेंटों के डराने-धमकाने और मानसिक उत्पीड़न ने उसे इस आत्मघाती कदम के लिए मजबूर किया। 30 प्रतिशत ब्याज और ‘गुंडा’ वसूली इन गुंडा बैंकों का काम करने का तरीका किसी माफिया से कम नहीं है। ये कंपनियां छोटे ऋणों पर 30 प्रतिशत तक की अत्यधिक ब्याज दरें वसूलती हैं। जब कोई परिवार किस्त देने में असमर्थ होता है, तो आपराधिक पृष्ठभूमि वाले रिकवरी एजेंटों को भेजा जाता है। ये एजेंट महिलाओं को सरेआम अपमानित करते हैं, जिससे कई परिवार अपना राशन, गहने और यहाँ तक कि घर के बर्तन बेचने को मजबूर हो जाते हैं।

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प्रशासनिक लापरवाही या मौन सहमति? सबसे हैरान करने वाली बात पुलिस और जिला प्रशासन की सुस्ती है। पिछले साल मार्च में बाजीदपुर गांव के शिवनाथ दास और उनकी पत्नी भुखली देवी ने भी इसी तरह कर्ज के दबाव में जान दे दी थी। बावजूद इसके, संबंधित कंपनियों पर आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जिले के वरिष्ठ उप-समाहर्ता विकास कुमार स्वीकार करते हैं कि जिले में केवल 22 कंपनियां ही पंजीकृत हैं, जबकि अवैध रूप से चलने वाली कंपनियों की संख्या अनगिनत है। नियम के मुताबिक ब्लॉक स्तर पर हर महीने समन्वय बैठकें होनी चाहिए, लेकिन बीडीओ (BDO) स्तर से किसी भी अवैध कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश न होना सिस्टम की विफलता को दर्शाता है। इंसाफ का इंतजार एसएसपी सुशील कुमार ने जांच की बात तो कही है, लेकिन हकीकत यह है कि घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी जिम्मेदार संस्थाओं और उनके एजेंटों पर शिकंजा नहीं कसा जा सका है। रूपनपट्टी जैसे गांवों में इन कंपनियों की गुप्त बैठकें होती हैं, लेकिन पुलिस की पहुंच वहां तक नहीं हो पा रही है।

मुजफ्फरपुर के गरीबों के लिए यह स्थिति बेहद गंभीर है। अगर समय रहते इन “मौत के सौदागरों” पर लगाम नहीं लगाई गई, तो न जाने और कितनी दीपा और कितने शिवनाथ दास कर्ज की वेदी पर बलि चढ़ जाएंगे। कर्ज और आर्थिक तंगी से परेशान परिवारों के मामलों पर बिहार की आर्थिक अपराध इकाई कार्रवाई करेगी। एनबीएफसी और नॉन बैंकिंग कंपनियों की वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ दर्ज मामले में कार्रवाई तेज की जाएगी। जल्द ही आर्थिक अपराध इकाई की ओर से आरोप पत्र दाखिल किया जाएगा। इसे लेकर अनियमित जमा योजनाओं प्रतिबंध अधिनियम, 2019 बैनिंग ऑफ अन रेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम एक्ट- 2019 के तहत गठित समिति में ये निर्णय लिया गया। मूजफ्फरपुर में सामूहिक आत्महत्या कांड के बाद ऐसे मामले में कार्रवाई की जाएगी। आर्थिक अपराध इकाई को निर्देश दिए गए हैं कि जांच के बाद उसे त्वरित कोर्ट में भेजा जाए। शिकायत गलत होने पर मामले बंद किए जाएं। सरकार इसके लिए प्रचार प्रसार भी करेगी। मुजफ्फरपुर में तीन बेटियों के साथ एक पिता ने सुसाइड कर लिया था। उसके बाद से राज्य सरकार एक्शन में है।

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