पटना: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि भूमि सुधार और जनकल्याण के किसी भी कार्य में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने पटना में आयोजित कार्यशाला में कहा कि जनता की परेशानी दूर करने के लिए इसका आयोजन किया गया है। उन्होंने साफ कहा है कि जनता की परेशानी को समय सीमा के अंदर दूर करना सबकी प्राथमिकता होनी चाहिए। विजय सिन्हा ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि फर्जी कागजात के आधार पर आवेदन करने वालों की पहचना कर अंचलाधिकारी आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने का काम करेंगे। इस कार्य में भूमि सुधार उपसमाहर्ता और अपर समाहर्ता का सहयोग लिया जाए। विजय सिन्हा ने कहा कि गलत कागजात का प्रयोग करने वालों को किसी भी हाल में छोड़ा नहीं जाएगा। उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
मंत्री विजय सिन्हा ने साफ किया है कि जमीनी स्तर पर सुधार लाने के लिए 100 दिन की कार्ययोजना बनाई गई है, जिसके तहत जिलों में भूमि सुधार जनकल्याण संवाद आयोजित किए जा रहे हैं। विभाग की पहली प्राथमिकता दाखिल- खारिज, परिमार्जन प्लस और वासविहीन गरीबों को अभियान बसेरा- 2 के तहत जमीन के साथ आने वाले सभी मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित कराया जाए। विजय सिन्हा ने साफ किया है कि दाखिल- खारिज और परिमार्जन प्लस के मामलों को आनावश्यक रूप से लंबित रखने और खारिज करने की प्रवृत्ति पर रोक लगनी चाहिए। इसकी नय साल में प्रमंडलवार फिर से समीक्षा की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया है कि नियमसंगत और सुसंगत कार्य करने वाले अधिकारियों को सम्मानित किया जाएगा।
वहीं सभी अंचलों में शिकायत पेटी लगाने और अंचलाधिकारी द्वारा स्वयं उसे खोलकर शिकायतों का निष्पादन करने का निर्देस दिया गया है। इसी तरह की व्यवस्था भूमि सुधार उपसमाहर्ताओं को भी सुनिश्चित करनी होगी। विजय कुमार सिन्हा ने अनैतिक कार्यों पर चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसे मामलों के इलाज के लिए मुख्यालय स्तर तक उड़नदस्ता गठित किया जा रहा है, जो औचक रूप से फील्ड में पहुंचकर जांच करेगा और अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि आम लोगों के आवेदनों को स्वीकर कर उन्हें पावती देना अनिवार्य है। यदि अंचल स्तर पर सुनवाई नहीं होती है, तो क्रमशः आगे के और ऊपर के अधिकारियों को शिकायत की जा सकेगी। अंतिम विकल्प के रूप में मुख्यालय स्तर पर प्रधान सचिव, सचिव और अथवा मंत्री तक मामला पहुंचे।







