
पटना: केंद्र सरकार बिहार में परमाणु ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने राज्य में तीन परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Nuclear Power Plants) स्थापित करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस महत्वपूर्ण परियोजना की जानकारी राज्य के गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से साझा की है। परियोजना को मूर्तरूप देने के लिए,केंद्र सरकार ने एनपीसीआईएल (NPCIL) और एनटीपीसी (NTPC) की एक संयुक्त टीम के साथ मिलकर काम शुरू कर दिया है। यह संयुक्त टीम बिहार के तीन संभावित स्थानों—सीवान, बांका और रजौली (नवादा) में परियोजना के लिए प्रारंभिक सर्वे कर रही है।
परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना एक जटिल प्रक्रिया है, जिसके लिए कठोर तकनीकी और पर्यावरणीय मापदंडों का पालन करना आवश्यक होता है। एनपीसीआईएल-एनटीपीसी की संयुक्त टीम इन तीनों स्थानों पर निम्नलिखित सभी महत्वपूर्ण पहलुओं की गहनता से जांच कर रही है। भूकंपीयता (Seismicity): भूकंप की आशंका और संरचनात्मक सुरक्षा। जल उपलब्धता: संयंत्रों को ठंडा करने और अन्य जरूरतों के लिए पानी की पर्याप्त आपूर्ति। भूमि उपलब्धता: बड़े पैमाने पर संयंत्र स्थापित करने के लिए आवश्यक भूमि।
जनसंख्या घनत्व: सुरक्षा मानकों के अनुरूप आसपास की आबादी का घनत्व। जमीनी स्थिति: भूवैज्ञानिक स्थिरता और निर्माण की व्यवहार्यता। जांच और मूल्यांकन के बाद, यह संयुक्त टीम जल्द ही केंद्र और राज्य सरकारों को अपनी विस्तृत रिपोर्ट (Detailed Report) सौंपेगी। यह कदम भारत सरकार के महत्वाकांक्षी लक्ष्य—देश में 100 गीगावाट (GW) परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लक्ष्य को शीघ्र प्राप्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। बिहार में तीन परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना न केवल राज्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक होगी, बल्कि राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित होगी।






