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त्रिपिटक समारोह के छठे दिन इंडोनेशियाई संघ ने की विश्वशांति की प्रार्थना, गूंजा ‘साधु-साधु’

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On the sixth day of the Tripitaka celebrations, the Indonesian Association prayed for world peace, echoing with the chants of "Sadhu-Sadhu"

गयाजी: भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली बोधगया का कालचक्र मैदान और महाबोधि परिसर में मधुर बुद्ध-ध्वनि से गूंज उठी। अंतरराष्ट्रीय त्रिपिटक संगायन समारोह के छठे दिन का मुख्य आकर्षण इंडोनेशिया का भिक्षु संघ रहा। इंडोनेशिया से आए सौ से अधिक भिक्षु पीले वस्त्र में मुख्य पांडाल में जमा हुए और छठी महासंगीति की परंपरा के अनुसार विनय पिटक की चुनिंदा गाथाओं का पारंपरिक स्वरों में सामूहिक पाठ किया। प्रत्येक गाथा के अंत में ‘साधु-साधु-साधु’ की गूंज के साथ विश्व शांति, सभी प्राणियों के मंगल और युद्ध-कलह के अंत की कामना की गई। बुद्ध वचनों का ये सुमधुर निनाद इतना शांत था कि उपस्थित हजारों श्रद्धालु आंखें बंद कर निश्चल हो गए।

कालचक्र मैदान के मुख्य मंच पर तेलंगाना के प्रसिद्ध नाट्यकार और फिल्म निर्माता केके राजा का विशेष सम्मान समारोह आयोजित हुआ। उन्हें ‘द जर्नी ऑफ बुद्ध’ नाम के भव्य महानाट्य के लेखन, निर्देशन और निर्माण के लिए स्वर्ण जड़ित बुद्ध प्रतिमा, शॉल और प्रशस्ति-पत्र भेंट किए गए। सम्मान ग्रहण करते हुए केके राजा ने कहा कि भगवान बुद्ध का जीवन स्वयं सबसे महान नाटक है और यह सम्मान उनके पूरे दल को समर्पित है।

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बंगलौर के कलाकारों ने ‘बुद्ध- द लाइट ऑफ द वर्ल्ड’ नाम के नृत्य-नाटिका का भव्य मंचन किया, जिसने दर्शकों को भावुक कर दिया। महाबोधि मंदिर के ठीक पीछे पावन बोधिवृक्ष के नीचे, थाईलैंड के विख्यात धम्माचार्य भंते फ्रमाटा किरनी श्रीवुत्था ने धम्म-टॉक दिया। लगभग दस हजार श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए भंते ने कहा कि बुद्ध का संदेश मैत्री, करुणा, शांति और सद्भाव पर आधारित है। उन्होंने पंचशील के कठोरता से पालन पर जोर दिया और कहा कि इसका पालन करने से व्यक्तिगत जीवन ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र से भी अपराध और कलह समाप्त हो सकते हैं। उनके संबोधन के बाद सैकड़ों युवाओं ने आगे आकर जीवन-पर्यंत पंचशील पालन का संकल्प लिया।

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