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बिहार में सख्ती बढ़ी: राजस्व विभाग में अचानक हुई IAS अफसर की एंट्री, अंदरूनी निगरानी तेज

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Strictness increased in Bihar: IAS officer suddenly entered the Revenue Department, internal surveillance intensified.

पटना: बिहार की सत्ता में हाल ही में हुए प्रशासनिक फेरबदल ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। खासकर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में वरिष्ठ IAS अधिकारी सीके अनिल को प्रधान सचिव बनाए जाने को लेकर कई तरह की चर्चाएँ हो रही हैं। माना जा रहा है कि यह कदम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के बीच चल रही पुरानी तनातनी से भी जुड़ा हुआ है।

IAS बदलाव और राजनीति में उबाल

बीजेपी के कई नेताओं का आरोप रहा है कि मुख्यमंत्री के सचिव उनके काम में बाधा डालते हैं। वहीं मंत्रियों का कहना है कि मुख्यमंत्री अपने सहयोगी दल के विभागों पर सचिवों के माध्यम से नियंत्रण रखते हैं। इसी पृष्ठभूमि में राजस्व विभाग में सीके अनिल की तैनाती को “संदेश” के रूप में देखा जा रहा है।

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राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीश कुमार की ‘नजर’ शायद अब उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा पर है, जिनका मुख्यमंत्री से कई मुद्दों पर टकराव रहा है। विधानसभा में दोनों के बीच हुई तीखी बहस और चुनावी बयानबाजी ने भी उनके रिश्तों में कड़वाहट बढ़ाई थी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पूर्व के बयानों और व्यवहार को लेकर सिन्हा अब नीतीश के खास “टारगेट” पर हो सकते हैं।

क्यों खास है राजस्व विभाग?

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग पहले भी विवादों में रहा है।

  • विभाग में तबादलों का बड़ा कारोबार होने की शिकायतें कई बार उठ चुकी हैं।
  • 2020 में करीब 650 अधिकारियों के तबादले मुख्यमंत्री के आदेश पर रोक दिए गए थे।
  • तब यह आरोप लगे थे कि तबादलों में भारी गड़बड़ी और करोड़ों की हेराफेरी हुई है।
  • 2022 में भी इसी विभाग के 30 जून वाले तबादले रोक दिए गए, जिस पर तत्कालीन मंत्री रामसूरत राय बेहद नाराज हुए थे और अपनी पीड़ा सार्वजनिक की थी।

इन घटनाओं के कारण यह विभाग लंबे समय से नीतीश कुमार की विशेष निगरानी में रहा है।

सीके अनिल की नियुक्ति: सियासी संदेश?

सीके अनिल को कड़े और अनुशासित अधिकारी माना जाता है। उनकी नियुक्ति को विशेषज्ञ
विजय कुमार सिन्हा पर tightened supervision के रूप में देख रहे हैं।
यह माना जा रहा है कि:

  • राजस्व विभाग में सुधार के नाम पर नीतीश कुमार नियंत्रण बढ़ाना चाहते हैं।
  • उपमुख्यमंत्री सिन्हा की “तुनकमिजाजी” और पुराने विवादों के कारण यह बदलाव उनके लिए कठिन परिस्थितियाँ पैदा कर सकता है।
  • विभाग में नियम-विरुद्ध होने वाले ट्रांसफर-पोस्टिंग पर अब कड़ी रोक लग सकती है।

आगे का राजनीतिक माहौल

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह प्रशासनिक बदलाव आने वाले दिनों में सरकार के भीतर खींचतान को और बढ़ा सकता है। नीतीश कुमार और विजय कुमार सिन्हा के तनावपूर्ण संबंधों को देखते हुए यह फैसला भविष्य की राजनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकता है।

कुल मिलाकर, सीके अनिल की एंट्री ने बिहार की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है, और संकेत साफ हैं—राजस्व विभाग में सख्ती बढ़ने वाली है और सत्ता के भीतर समीकरण भी बदल सकते हैं।

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