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आधी आबादी को नहीं मिला एक चौथाई प्रतिनिधित्व, जानें किस पार्टी से कितनी महिला विधायक

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Half the population did not get even a quarter of the representation, find out how many women MLAs from which party

पटना: विधानसभा चुनाव 2025 में आधी आबादी ने एनडीए को 200 का आंकड़ा पार तो करा दिया, पर खुद के लिए सदन में आधी क्या एक चौथाई प्रतिनिधित्व भी नहीं पा सकी। आज भी चुनावी ‘जंग’ में आधी आबादी की भागीदारी का प्रतिशत भी पुरुषों की अपेक्षा कम रह गया है। साथ ही आधी आबादी की जीत का प्रतिशत भी काफी कम रहा है। भागीदारी की बात करें तो वर्ष 2025 की ‘जंग’ में आधी आबादी को टिकट देकर सम्मान करने में राष्ट्रीय जनता दल ने बाजी मारी। भारतीय जनता पार्टी और जदयू दोनों ही महिला को टिकट देने में दूसरे नंबर पर रहे। बिहार विधानसभा 2025 के चुनावी जंग में अभी भी दलीय प्रत्याशी की संख्या कम है। वोट को लेकर राज्य की तमाम पार्टियां आधी आबादी के प्रति आग्रही जरूर हैं, पर उन्हें चुनावी टिकट का सम्मान देने में राज्य की प्रमुख पार्टियां भी काफी पीछे हैं।

विधानसभा चुनाव 2025 की बात करें तो इस बार के चुनाव में 2357 पुरुषों के बरक्स मात्र 258 महिला उम्मीदवार ही चुनावी जंग में शामिल रहीं। राज्य के प्रमुख दलों की बात करें तो आधी आबादी को सबसे ज्यादा टिकट देने वाली पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) बनी। राष्ट्रीय जनता दल के युवा नेता तेजस्वी यादव ने 23 महिलाओं को टिकट दिया। राष्ट्रीय कांग्रेस ने 6, वीआईपी ने एक और वाम दलों ने कुल एक को चुनावी जंग में उतारा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में शुभ-शुभ बात करने वाली पार्टी बीजेपी ने एक अशुभ संख्या यानि कुल 13 महिलाओं को टिकट दिए। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी आधी आबादी को प्रतिनिधित्व देते बीजेपी के ही बराबर यानि 13 टिकट भी दिए हैं। लोकजनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने 5 महिलाओं को उम्मीदवार बनाया तो वहीं जीतनराम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) ने दो महिलाओं को टिकट दिया। यह दीगर कि इन दो उम्मीदवारों में एक जीतन राम मांझी की एक बहू और दूसरी समधन थी।

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राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने भी एक महिला स्नेहलता को चुनावी जंग में उतारा। उपेंद्र कुशवाहा ने भले यह टिकट अपनी पत्नी को दिया, पर महिला के प्रतिशत में इजाफा हो, इसकी ओर कदम जरूर बढ़ाया। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में लैंड स्लाइड लाने वाली आधी आबादी खुद को चुनावी जीत से जोड़ने में काफी पीछे रहीं। यह सवाल तो है किन राजनीतिक दलों ने भी आधी आबादी को टिकट देने में कोताही बरती पर जनता ने भी उस अनुपात में उन्हें चुनाव जीत का झंडा नहीं थमाया। बिहार विधानसभा की ‘जंग’ में कुल 258 महिलाएं चुनावी जंग में उतरीं, पर जीत मात्र 29 महिलाओं के हाथ लगी। इनमें भी 25 महिलाएं वो थी जो एनडीए की टिकट पर लड़ी थी। भारतीय जनता पार्टी ने कुल 13 महिलाओं को चुनावी जंग में उतारा, पर उनमें 10 के हाथ जीत लगी। जदयू ने भी 13 महिलाओं को टिकट दिया, पर उनमें से 10 महिलाओं ने जीत दर्ज की। लोजपा (आर) ने 29 में पांच महिलाओं को टिकट दिया, उनमें से तीन महिलाओं ने जीत दर्ज की।

राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने एक महिला को टिकट दिया और वो चुनाव में जीत गईं। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा ने दो महिलाओं को टिकट दिया और दोनों ही जीत गईं। महागठबंधन की तरफ से कुल 31 महिलाओं को टिकट दिए गए, पर जनता ने उनमें से मात्र तीन महिलाओं को वोट दे कर विधायक चुना। कांग्रेस ने छह महिलाओं को टिकट दिया और छह की छह हार गईं। माले और वीआईपी ने एक एक महिला को टिकट दिया, पर सभी हर गईं। बिहार विधानसभा वर्ष 2020 की चुनावी जंग में 115 सीटों पर जंग लड़ने वाले सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड ने 22 महिलाओं को टिकट दिया था। 110 सीटों पर चुनाव लड़ रही भारतीय जनता पार्टी ने 13 महिलाओं को मैदान में उतारा है। वहीं कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल और वामपंथी दल – सीपीआई, सीपीआई (M) और सीपीआई (ML) ने 243 सीटों में से 24 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया था। राजद ने जहां 16 महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था, वहीं कांग्रेस ने सात और वाम दलों ने सिर्फ एक महिला उम्मीदवार को उतारा था।

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