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चिराग की धन्यवाद यात्रा शुरू, चाचा पारस से ‘बड़ी सेना’ छीनने की तैयारी

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Chirag's thanksgiving tour begins, preparing to snatch 'big army' from uncle Paras

पटना: केंद्रीय मंत्री और लोजपा (रालोजपा) प्रमुख चिराग पासवान ने शुक्रवार को कहा कि उनकी पार्टी राज्य के छोटे-छोटे मुद्दों को सुलझाने के लिए बिहार यात्रा शुरू करेगी। चिराग ने यह भी कहा कि जमुई के सांसद अरुण भारती के नेतृत्व में दलित सेना को पुनर्जीवित और पुनर्गठित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का स्थापना दिवस 28 नवंबर को पटना में भव्य तरीके से मनाया जाएगा। दिवंगत रामविलास पासवान ने अपने रहते ही दलित सेना बनाई थी। ये सेना एक तरह से लोजपा के वोट बैंक को बनाए रखने के लिए जमीन पर उतारे गए लोजपा कार्यकर्ता थे। जब पार्टी में टूट हुई तो दलित सेना को पशुपति पारस ने अपने पास ही रखा। अब बिहार चुनाव में शानदार जीत के बाद चिराग पासवान फिर से दलित सेना को जिंदा करने जा रहे हैं। नई सेना बनाने का काम उन्होंने अपने जीजा और जमुई सांसद अरुण भारती को दिया है।

बिहार में जीत के साथ ही चिराग पासवान ने अपना प्लान नंबर 2 एक्टिवेट कर दिया है। चिराग ने कहा कि वह बिहार से आगे पश्चिम बंगाल, पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में अपनी पार्टी का विस्तार करना चाहते हैं और एनडीए के सहयोगी के रूप में चुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं । उन्होंने हंसते हुए कहा, ‘एनडीए की तरफ से लड़ी गई 29 सीटों में से 19 पर हमने जनता के आशीर्वाद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन के कारण जीत हासिल की। बिहार में लोजपा (रामविलास) को दो मंत्री पद दिए गए हैं। मैं संतुष्ट हूं। चिराग कितना लालची हो सकते है। और कुछ मांगना ऐसा ही होगा।’ एलजेपी (रामविलास) विधायक संजय कुमार (पासवान) को गन्ना उद्योग आवंटित किया गया है, जबकि महुआ विधायक संजय सिंह को पीएचईडी मंत्रालय दिया गया है। संजय सिंह ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल प्रमुख तेज प्रताप यादव को हराया । चिराग ने विपक्षी राजद और कांग्रेस की भी आलोचना की, क्योंकि वे 2005 से जनता द्वारा उन्हें नकारे जाने का आत्मनिरीक्षण करने के बजाय, SIR और वोट चोरी का दोष मढ़ रहे हैं।

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चिराग ने कहा, ‘अगर वे बहाने बनाते रहेंगे तो लालू जी की तीसरी पीढ़ी भी सत्ता में नहीं आएगी। उनकी मानसिकता और सोच ही राजद और कांग्रेस के पतन का कारण बनी। हमें भी हार का सामना करना पड़ा, लेकिन हमने यह आकलन किया कि हमसे कहां गलती हुई। हार के बाद, आपको ईमानदारी से आत्मनिरीक्षण करने की जरूरत होती है।’ लोजपा (रामविलास सुप्रीमो) ने कहा कि उनकी पार्टी ने बिहार के सभी जिलों में अपना संगठन खड़ा किया और कड़ी मेहनत की, जिसका नतीजा चुनाव परिणामों में दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा, ‘इन 5 सालों में पार्टी ने 2020 के चुनावों की तुलना में अपने वोट शेयर में और बढ़ोतरी की है। इस बार हमने सिर्फ 29 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन हमारा वोट शेयर 5% तक पहुंच गया। यह लोजपा (रामविलास) की निरंतर वृद्धि को दर्शाता है।’

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