
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार मिलने के बाद जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर मंगलवार को पहली बार मीडिया के सामने आए और स्पष्ट कर दिया कि वे बिहार छोड़ने वाले नहींहैं।। उन्होंने कहा कि अब सलाह नहीं संघर्ष करने के समय आ गया है। प्रशांत किशोर ने कहा कि हम लोगों ने अपनी बात ठीक ढंग से जनता को नहीं बताई। उस कारण शायद जनता ने वोट नहीं दिया। खुद पर इसकी जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने कहा कि वे जिस विश्वास की उम्मीद कर रहे थे, वह विश्वास नहीं जीत पाए।
जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर ने मंगलवार को दावा किया कि अगर सीएम ने हर विधानसभा क्षेत्र में 60,000 से अधिक लाभार्थियों को 10,000 रुपये नहीं दिए होते तो जेडीयू 25 सीट भी नहीं जीत पाती। इससे जेडीयू के सीटों की संख्या बढ़ी। प्रशांत किशोर ने कहा कि एनडीए सरकार ने जनता के पैसों से 40,000 करोड़ रुपये की घोषणाएं कीं और चुनाव से ठीक पहले बहुत पैसे बांटे। उन्होंने कहा कि ‘मैं बिहार को समझने में नाकाम रहा। 20 को उपवास करूंगा। हमने लोगों को मुद्दे समझाने की ईमानदार कोशिश की लेकिन चुनाव नतीजे बेहतर नहीं आए। इसकी पूरी जिम्मेदारी मेरी है। मेरी पार्टी से कोई विधायक नहीं बना लेकिन अब जनता के बीच जाकर संघर्ष करेंगे।
अंग्रेजी में एक मुहावरा है, आप तब तक नहीं हारते, जब तक आप खेल छोड़ नहीं देते। मेरी पार्टी ने न तो समाज को बांटा और न ही लोगों के वोट खरीदे हैं।’ प्रशांत किशोर ने कहा कि उन्होंने कहा कि जिन बातों को लेकर वह जनता के बीच पहुंचे थे और उनको एक सपना दिखाया था, उसे वे पूरा नहीं कर सके। इसके प्रायश्चित के तौर पर वे 20 नवंबर को भितिहरवा आश्रम में एक दिन का मौन सामूहिक उपवास रखेंगे। अब सियासी गलियारे में चर्चा इस बात की है कि प्रशांत किशोर ने कहा था कि नीतीश कुमार की पार्टी को चुनाव में 25 सीटों से ज्यादा आ गई तो वो राजनीति से संन्यास ले लेंगे। लेकिन अब पीके ने इसके लिए 10 हजार का आरोप लगा नए सिरे से सियासत शुरू कर दी है।






