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राघोपुर में तेजस्वी की मुश्किल बढ़ी, तीसरी बार जीत बन गई बड़ी चुनौती

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Tejashwi's troubles increase in Raghopur, winning for the third time has become a big challenge.

राघोपुर: महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव राघोपुर सीट से लगातार तीसरी बार जीत की तलाश में हैं। शनिवार को तेजस्वी यादव के लिए व्यस्तताओं भरा दिन रहा। उनके दिनभर के चुनावी कार्यक्रम में 16 जनसभाएं शामिल थीं। उनका आखिरी कार्यक्रम अपने पिता और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद के ‘गढ़’ रहे राघोपुर निर्वाचन क्षेत्र के शिवनगर में एक जनसभा के साथ समाप्त होना था। हालांकि खराब मौसम के कारण तेजस्वी को कुछ जनसभाएं रद्द करनी पड़ीं, लेकिन वह किसी भी कीमत पर राघोपुर का कार्यक्रम छोड़ने को तैयार नहीं थे। उन्होंने कुछ स्थानों पर फोन के माध्यम से लोगों से संपर्क साधा और फिर देर शाम पटना से सड़क मार्ग से शिवनगर पहुंचे। खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर पायलट को हो रही परेशानी बताते हुए तेजस्वी ने भीड़ से कहा, ‘मैंने पायलट से मुझे पटना में उतारने का अनुरोध किया। मैं सड़क मार्ग से राघोपुर जाऊंगा।’

वोटरों से अपील करते हुए तेजस्वी ने कहा कि वे इस बार विधायक नहीं, बल्कि एक मुख्यमंत्री चुनने जा रहे हैं। उन्होंने वादा किया कि महागठबंधन के सत्ता में आने पर राघोपुर में एक डिग्री कॉलेज और एक आधुनिक अस्पताल बनाया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘ये कामवा मुख्यमंत्री से ही होगा।’ उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे उन्हें जीत की चिंता से मुक्त कर दें, ताकि वे पूरे बिहार में प्रचार कर सकें। शिवनगर में उनकी बहनें रोहिणी आचार्य और रागिनी भी रोड शो करने के बाद उनके साथ शामिल हुईं। एक वोटर उमेश यादव ने बताया, ‘पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी भी हाल ही में इस क्षेत्र में आई थीं। लालूजी की बेटी और RJD सांसद मीसा भारती भी लगातार इस सीट पर प्रचार कर रही हैं।’ पटना के पड़ोसी जिले वैशाली में गंगा के दियारा क्षेत्र के रूप में मशहूर राघोपुर, अपनी कठिन स्थलाकृति के कारण किसी भी नेता के लिए आसान सीट नहीं है। मुख्यमंत्री रहते हुए लालू प्रसाद और उनकी पत्नी राबड़ी देवी ने इस सीट का प्रतिनिधित्व किया है। लालू परिवार के लिए यहाँ की यादव मतदाताओं की उच्च उपस्थिति हमेशा से अनुकूल रही है।

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गंगा नदी पर नए पुल के निर्माण के बाद राघोपुर की पहुंच पटना से आसान हो गई है। इस बार राघोपुर में एनडीए और विपक्षी महागठबंधन दोनों के लिए राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए के साथ चिराग पासवान नहीं थे, वहीं महागठबंधन के साथ मुकेश सहनी नहीं थे। कागजों पर इस बार दोनों गठबंधन पहले से ज्यादा ताकतवर दिख रहे हैं। राघोपुर सीट हाजीपुर संसदीय सीट का हिस्सा है, जिसका प्रतिनिधित्व लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान करते हैं। चिराग पासवान इस क्षेत्र में एक मजबूत राजनीतिक शक्ति हैं। चिराग पासवान के पास अपना मजबूत वोट बैंक का आधार है। राघोपुर सीट पर यादवों के बाद SC (अनुसूचित जाति) मतदाताओं की अच्छी खासी उपस्थिति है। राजपूत वोटर भी यहां मायने रखते हैं।

इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार NDA ने राघोपुर में अपना पुराना और स्थानीय यादव चेहरा सतीश कुमार को मैदान में उतारा है। सतीश कुमार के जरिए एनडीए की कोशिश है कि राघोपुर में यादव वोटों को अपने पाले में किया जाए। बता दें, यह वही सतीश कुमार हैं, जिन्होंने 2010 में जदयू उम्मीदवार के रूप में राबड़ी देवी को हराया था। हालांकि, 2015 और 2020 में उन्हें तेजस्वी यादव से हार का सामना करना पड़ा था। जन सुराज ने भी यहां चंचल कुमार को मैदान में उतारा है। केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने सतीश कुमार के पक्ष में न केवल प्रचार किया है, बल्कि क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में पंचायत प्रतिनिधियों के साथ बैठकें भी की हैं। हालांकि राजद भी एनडीए खेमे में चिराग पासवान की मौजूदगी से उत्पन्न नई चुनौतियों से अवगत है। राजद के दलित चेहरे शिव चंद्र राम यहां प्रचार कर रहे हैं। राम पिछले लोकसभा चुनावों में चिराग के खिलाफ RJD के उम्मीदवार थे।

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