बांका: विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे के बाद जिले की राजनीति में जबरदस्त हलचल तेज हो गई है। कई पुराने नेता अब अपने नए राजनीतिक ठिकाने तलाशने में जुट गए हैं। जो नेता कल तक जदयू के “तीर” की आलोचना करते नहीं थकते थे, आज वही तीर का दामन थामते नजर आ रहे हैं। दल-बदल और बागियों की बढ़ती सक्रियता ने जिले के सियासी समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है। जानकारी के अनुसार, जिले की पांच विधानसभा सीटों से इस बार कुल 58 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें सबसे अधिक 15 उम्मीदवार बेलहर से और सबसे कम 8 उम्मीदवार धोरैया (सुरक्षित) सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।
दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को प्रस्तावित है, ऐसे में सभी प्रत्याशी प्रचार में पूरी ताकत झोंक चुके हैं। धोरैया सीट से राजद विधायक भूदेव चौधरी का टिकट कटने के बाद पार्टी समर्थकों में नाराजगी फैल गई है। इसी नाराजगी के बीच युवा प्रदेश राजद सचिव नयन सिंह नटवर ने पार्टी और पद से इस्तीफा देकर जदयू को समर्थन देने की घोषणा की है। उनके साथ राजद जिला उपाध्यक्ष प्रो. उमाशंकर सिंह, रखाल प्रसाद सिंह, पवन मंडल समेत कई कार्यकर्ता भी लालटेन छोड़ तीर में शामिल हो गए हैं। वहीं, बेलहर विधानसभा से जदयू सांसद गिरिधारी यादव के पुत्र चाणक्य प्रकाश रंजन को टिकट मिलने के बाद राजद में भी भारी उथल-पुथल मच गई है।
राजद के एक दर्जन से अधिक स्थानीय नेता जदयू में शामिल हो गए हैं। इनमें चांदन प्रखंड के लालमु, कमाल अंसारी, जफीर अंसारी, महेंद्र राय और इतवारी राय शामिल हैं। उधर, भाजपा के पूर्व प्रखंड अध्यक्ष मनीष कुमार शर्मा, विनोद पांडेय, निर्मल पांडेय और रंजन वर्णवाल ने राजद का दामन थाम लिया है। इससे तीनों प्रमुख दलों भाजपा, राजद और जदयू के बीच सियासी समीकरण नए सिरे से बन रहे हैं। चार बागी उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है। भाजपा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य कौशल कुमार सिंह, टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर जनसुराज पार्टी से बांका सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में जिले की राजनीति में इस बार का चुनाव जातीय और दलगत समीकरणों से ज्यादा व्यक्तिगत वफादारी और असंतोष पर आधारित दिखाई दे रहा है।







