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कभी पत्नी की हेलीकॉप्टर से की विदाई, अब फिर चर्चा में पूर्व MLA तौसीफ आलम

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Former MLA Tauseef Alam is in the news again after he bid farewell to his wife in a helicopter.

किशनगंज: किशनगंज जिले के बहादुरगंज से बिहार चुनाव लड़ रहे AIMIM के उम्मीदवार तौसीफ आलम का विवादों से गहरा नाता रहा है। वे कांग्रेस के टिकट पर चार बार यहां से विधायक रहे हैं। 2013 में तौसीफ आलम तब चर्चा में आये थे, जब शादी के बाद वे अपनी दुल्हन को हेलीकॉप्टर से घर ले आये थे। दुल्हन की विदाई के लिए जो हेलीकॉप्टर किराये पर लिया गया था, उसके लिए विधायक ने 17 लाख 70 हजार रुपये की मोटी रकम खर्च की थी। इस शादी में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी आये थे। कहा जाता है कि उस समय नीतीश कुमार राजनीतिक संकट में घिरे हुए थे। सरकार बचाने के लिए कांग्रेस विधायक की शादी में आये थे। 2022 में भी तौसीफ आलाम ने तब सुर्खियां बटोरी जब उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम के चयन को हिंदू-मुसलमान का मुद्दा बना दिया। 2005 में तौसीफ आलम बहादुरगंज से पहली बार कांग्रेस के टिकट विधायक चुने गये थे। तब उनकी उम्र 26 साल थी। 2010 में कांग्रेस को केवल चार सीट ही मिली थी। तौसीफ आलम में भी उनमें एक थे। 2013 में 33 साल की उम्र में उनकी शादी हुई।

यह शादी बिहार की सबसे भव्य शादियों में एक गिनी जाती है। इस शादी में करीब 50 हजार लोगों को भोज पर आमंत्रित किया गया था। कहा जाता है कि इस शादी समारोह में करीब एक करोड़ रुपये खर्च किये गये थे। ये शादी तब और चर्चित हो गयी जब दुल्हन की विदाई हेलीकॉप्टर से हुई। विधायक तौसीफ आलम जब हेलीकॉप्टर से दुल्हन को लेकर घर पहुंचे तो देखने वालों की भीड़ लग गयी। विधायक तौसीफ आलम ने 2010 में जो चुनावी हलफनामा दिया था उसमें 6.92 लाख चल सम्पत्ति और 26.01 लाख की अचल सम्पत्ति घोषित की थी। तब सवाल उठा कि तीन साल बाद ऐसा किया मिल गया कि विधायक ने अपनी शादी पर एक करोड़ रुपये खर्च कर दिये। जब ये सवाल तौसीफ आलम से पूछा गया कि तो उन्होंने कहा कि ‘मेरे एक दोस्त ये हेलीकॉप्टर किराये पर लिया था। उसने अपनी खुशी के लिए यह सब किया। मैं अपने दोस्त या समर्थक को कैसे रोक सकता हूं। भोज में जो भी लोग आये वे मेरे क्षेत्र के अपने थे। शादी के भोज में तो अपने लोगों को बुलाया ही जाता है।’

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इस चुनावी हलफनामा में इस बात का भी जिक्र था कि तौसीफ आलम करीब छह गंभीर आपराधिक मामलों के आरोपी हैं। तौसीफ आलम की शादी के जश्न में हर्ष फायरिंग भी हुई थी। टीवी समाचारों में उनके समर्थकों को विवाह समारोह में फायरिंग करते हुए दिखाया भी गया था। सवाल उठा कि जिस समारोह में राज्य के मुख्यमंत्री (नीतीश कुमार) मौजूद हों, वहां गैरकानूनी रूप से कोई हर्ष फायरिंग कैसे कर सकता है ? उस समय किशनगंज के पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री दूल्हे के घर आयोजित समारोह में शामिल हुए थे, जब हर्ष फायरिंग हुई थी। अगर जरूरत पड़ी तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ये विवाह समारोह 28 अप्रैल 2013 को हुआ था। उस समय नीतीश कुमार, नरेन्द्र मोदी को लेकर खुलेआम भाजपा पर हमला बोलने लगे थे। भाजपा-जदयू की सरकार चल तो रही थी, लेकिन तनाव गहरा चुका था। 16 अप्रैल 2013 को नीतीश कुमार ने गुजरात दंगा नहीं रोकने के लिए नरेन्द्र मोदी की सार्वजनिक आलोचना की थी।

तब यह लगने लगा था कि भाजपा -जदयू की यह सरकार चंद दिनों की मेहमान है। नीतीश भी मन ही मन सोच रहे थे कि अगर वे भाजपा से गठबंधन तोड़ते हैं तो सरकार कैसे बचाएंगे ? कैसे बहुमत साबित करेंगे ? किसी की तो समर्थन लेना पड़ेगा। 2010 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के चार विधायक जीते थे। सदानंद सिंह विधायक दल के नेता थे। नीतीश कुमार सदानंद सिंह के साथ तौसीफ आलम के विवाह समारोह में पहुंचे। वहां कांग्रेस के चारों विधायक मौजूद थे। विधायक तौसीफ तो खुद दूल्हा ही थे। एक बंद कमरे में नीतीश कुमार और कांग्रेस के चारों विधायकों की बैठक हुई। ये बैठक करीब आधा घंटा तक चली। कहा जाता है कि इसी बैठक के बाद कांग्रेस ने नीतीश कुमार को समर्थन देने का फैसला कर लिया था। उस समय विधानसभा में जदयू के 118 विधायक थे। बहुमत के लिए चार विधायकों की जरूरत थी।

हालांकि नीतीश कुमार ने उस समय किसी राजनीतिक डील से इंकार किया था। लेकिन जब दो महीने बाद उन्होंने विधानसभा में विश्वासमत का प्रस्ताव रखा तो कांग्रेस के इन चारों विधायकों ने उनका समर्थन किया था। 2022 में जब टी-20 वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम का ऐलान किया गया था तब उसमें मोहम्मद शमी, मोहम्मद सिराज और खलील अहमद को जगह नहीं मिल पायी थी। इसके बाद तौसीफ आलम ने टीम सेलेक्शन में पक्षपात का आरोप लगाया था। उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा था, मोहम्मद शमी, मोहम्मद सिराज और खलील अहमद जैसे तेज गेंदबाजों को बाहर बैठाने पर बहुत हैरानी हुई। जब तक टीम इंडिया का चयन निष्पक्ष तरीके से नहीं होगा तब तक मैं क्रिकेट मैच नहीं देखूंगा। इस पोस्ट के बाद पूरे भारत में बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। यही तौसीफ आलम अब AIMIM के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं।

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