
पटनाः बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुक्रवार को संपन्न हो गई। निर्वाचन आयोग के अनुसार, पहले चरण के 121 विधानसभा क्षेत्रों के लिए अब तक 1,250 से अधिक उम्मीदवारों ने अपने नामांकन दाखिल किए हैं। ये संख्या और बढ़ सकती है क्योंकि कई जिलों से आंकड़े आने बाकी हैं। कम-से-कम आधा दर्जन सीटों पर ‘इंडिया’ गठबंधन के एक से अधिक उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि यदि इनमें से कोई प्रत्याशी 20 अक्टूबर तक नाम वापस नहीं लेता है तो ‘फ्रैंडली फाइट’ की स्थिति बन सकती है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद), कांग्रेस, तीन वामदलों और पूर्व मंत्री मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) वाले गठबंधन में अब तक सीटों के बंटवारे को लेकर स्पष्टता नहीं है।
कौन सी पार्टी किन सीटों पर लड़ेगी, इसे लेकर भी भ्रम बना हुआ है। कांग्रेस ने जाले सीट पर राजद नेता ऋषि मिश्रा को अपने चुनाव चिह्न पर लड़ने की अनुमति दी है, लेकिन बदले में राजद ने लालगंज सीट पर उदारता नहीं दिखाई, जहां माफिया और राजनीतिक नेता मुन्ना शुक्ला की पुत्री शिवानी शुक्ला ने नामांकन दाखिल किया, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार आदित्य कुमार राजा भी मैदान में हैं। वैशाली और कहलगांव में भी राजद-कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर की स्थिति बन रही है। इसके अलावा कांग्रेस को कम-से-कम तीन सीटों – बछवाड़ा, राजापाकर और रोसेरा- पर भाकपा उम्मीदवारों से मुकाबला करना पड़ सकता है। वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी इस बार स्वयं चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। उनकी पार्टी 2020 में चार सीटें जीतने में सफल रही थी।
उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘मैं राज्यसभा में जाने की कोशिश नहीं कर रहा हूं, बल्कि चाहता हूं कि ‘इंडिया’ गठबंधन की सरकार बने और मैं उपमुख्यमंत्री बनूं।’’ ‘इंडिया’ गठबंधन के मुख्यमंत्री पद के दावेदार माने जा रहे राजद नेता तेजस्वी यादव राघोपुर सीट से लगातार तीसरी बार चुनाव मैदान में हैं। पहले चरण में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (तरापुर) और विजय कुमार सिन्हा (लखीसराय) सहित कई दिग्गज नेता चुनावी रण में हैं। इनके अलावा मंत्री मंगल पांडे (भाजपा) और विजय कुमार चौधरी (जदयू) भी चुनाव मैदान में हैं। इधर भाजपा ने तेजतर्रार चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सारण में एक रैली को संबोधित किया और उसके बाद पटना में ‘‘बुद्धिजीवी सम्मेलन’’ में भाग लिया।शाह ने राजद शासन काल की तुलना ‘‘एक गड्ढे’’ से करते हुए कहा,‘‘हमने उस गड्ढे को भर दिया है और अब अगले पांच वर्षों में एक मजबूत इमारत खड़ी करेंगे।’’






